चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन क्षेत्र में लाइसेंस प्राप्त अफीम के अवैध विचलन (डायवर्जन) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। नीमच नारकोटिक्स विभाग की टीम ने कपासन के पांडोली रेलवे स्टेशन के पास एक मकान में छापा मारकर 52.494 किलोग्राम अफीम बरामद की है। यह अफीम तीन लाइसेंसधारी किसानों द्वारा किराए पर लिए गए एक कमरे में रखी हुई थी। नारकोटिक्स विभाग को सूचना मिली थी कि लाइसेंस प्राप्त अफीम के रिकॉर्ड और वास्तविक मात्रा में गड़बड़ी हो सकती है। इसी सूचना के आधार पर टीम मौके पर पहुंची और कमरे की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कमरे में बड़ी मात्रा में अफीम मिली, जिसे देखकर टीम ने तुरंत जांच शुरू कर दी। जांच में सामने आया कि किसानों के पास मौजूद अफीम की वास्तविक मात्रा और रजिस्टर में दर्ज मात्रा के बीच बड़ा अंतर है। इसके बाद नारकोटिक्स विभाग ने पूरी अफीम को जब्त कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। रजिस्टर में दर्ज मात्रा और वास्तविक अफीम में मिला बड़ा अंतर नारकोटिक्स टीम ने जब मौके पर अफीम का भौतिक सत्यापन किया तो पाया कि कमरे में रखी अफीम की मात्रा उस मात्रा से कई गुना ज्यादा है जो प्रारंभिक तौल रजिस्टर में दर्ज की गई थी। जांच के दौरान अधिकारियों ने किसानों के रिकॉर्ड और कमरे में रखी अफीम का मिलान करने की कोशिश की, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर सामने आया। अधिकारियों के अनुसार किसानों के पास जितनी अफीम पाई गई, उसका सही हिसाब रजिस्टर में दर्ज नहीं था। इसी वजह से यह संदेह पैदा हुआ कि लाइसेंस प्राप्त अफीम का अवैध रूप से डायवर्जन किया जा रहा था। जब अफीम की मात्रा का सही मिलान नहीं हो सका तो नियमों के अनुसार पूरी अफीम को जब्त कर लिया गया। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि अफीम की अतिरिक्त मात्रा कैसे और किस उद्देश्य से वहां रखी गई थी। नियमों के अनुसार रोजाना दर्ज करना होता है अफीम का रिकॉर्ड अफीम की खेती करने वाले किसानों के लिए सरकार की ओर से सख्त नियम बनाए गए हैं। एनडीपीएस नियम 1985 के नियम 13 के अनुसार किसानों को रोजाना डोडों पर चीरा लगाने के बाद एकत्रित की गई अफीम को दैनिक तौल के लिए पेश करना होता है। इसके बाद उस अफीम की मात्रा का सही रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इस प्रक्रिया में गांव के मुखिया की मौजूदगी में होती है और उसके बाद किसान तथा मुखिया दोनों के साइन किए जाते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि अफीम की हर दिन की मात्रा का सही हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो और उसका गलत उपयोग न हो सके। लेकिन इस मामले में जांच के दौरान सामने आया कि किसानों ने रोजाना की एंट्री सही तरीके से नहीं करवाई थी। कमरे में ज्यादा अफीम मिली, लेकिन रजिस्टर में नहीं थी एंट्री जांच में यह भी सामने आया कि तीनों किसानों ने अपने काम के लिए पांडोली स्टेशन के पास एक किराए का कमरा ले रखा था और वहीं रहकर अफीम से जुड़ा काम कर रहे थे। लेकिन जब नारकोटिक्स टीम ने वहां तलाशी ली तो कमरे में काफी ज्यादा मात्रा में अफीम रखी हुई मिली। जबकि उस मात्रा की एंट्री तौल रजिस्टर में दर्ज नहीं थी। सामान्य रूप से किसानों को हर दिन एकत्रित की गई अफीम का हिसाब मुखिया को बताना होता है और उसी के अनुसार रजिस्टर में एंट्री होती है। लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया था। किसान मौके पर नहीं मिले, जांच आगे जारी कार्रवाई के समय जिन किसानों के नाम पर अफीम का लाइसेंस है, वे मौके पर मौजूद नहीं थे। इसलिए नारकोटिक्स विभाग अभी उनसे पूछताछ नहीं कर पाया है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों से पूछताछ के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी कि रजिस्टर और वास्तविक मात्रा में इतना बड़ा अंतर कैसे हुआ। फिलहाल जब्त की गई अफीम को सुरक्षित रखा गया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
