सीकर जिले में एक प्रमुख हाईवे लगातार हादसों का कारण बनता जा रहा है। महज 60 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर पिछले तीन वर्षों में 317 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें करीब 200 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार बढ़ते हादसों और मौतों के आंकड़ों ने इस सड़क की खतरनाक स्थिति को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने अब इस मार्ग को फोरलेन में तब्दील करने की मांग तेज कर दी है, ताकि भविष्य में होने वाले हादसों पर रोक लगाई जा सके। सीकर जिले में नेशनल हाईवे-52 वैसे तो जयपुर से शुरू हो जाता है, लेकिन सीकर बाईपास से फतेहपुर तक 60 किलोमीटर में जगह-जगह एक्सीडेंट जोन बन गए हैं। केंद्रीय मंत्री से लेकर सांसद और स्थानीय नेताओं ने फोरलेन बनाने और अन्य उपाय करने को लेकर बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन आज तक काम भी शुरू नहीं हुआ है। जयपुर रोड पर प्रवेश से पहले रामू का बास तिराहे से बाईपास शुरू सीकर शहर में जयपुर रोड पर प्रवेश से पहले रामू का बास तिराहे से बाईपास शुरू होता है। बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और सालासर जाने वाला पूरा ट्रैफिक इधर से होकर गुजरता है। जयपुर से सीकर और फिर सीकर से लक्ष्मणगढ़ रोड भले ही फोरलेन बना दी गई है, लेकिन सीकर में गुजरने वाला बाईपास आज भी टू लेन का ही है। इसके बाद लक्ष्मणगढ़ से फतेहपुर तक फिर इसे टू लेन का छोड़ दिया गया। वहीं फतेहपुर से आगे रामगढ़ की तरफ फिर फोरलेन बना दिया गया। बीच में जो हिस्से टू लेन के छोड़े गए हैं, यही सबसे बड़े एक्सीडेंट जोन हैं। दो साल पहले केंद्रीय मंत्री ने फोरलेन बनाने का दिया था आश्वासन हालांकि, 2 साल पहले सीकर आए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इसे फोरलेन बनाने का आश्वासन दिया था। उस वक्त तत्कालीन सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने भी जल्दी फोरलेन बनाने का दावा किया था। इसे लेकर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा और फतेहपुर के विधायक हाकम अली कई बार आवाज उठा चुके हैं, लेकिन आज तक इसके टेंडर तक नहीं हुए हैं। फतेहपुर से रामू का बस तिराहा तक 60 किलोमीटर का यह रोड जो जहां-जहां टू लेन का है, वहां-वहां सबसे ज्यादा लोग अपनी जान गवां रहे हैं। पुलिस महकमे के आंकड़ों पर गौर करें तो इस हाईवे पर फतेहपुर से रामू का बस तक पिछले 3 साल में रोड एक्सीडेंट में 200 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। प्रशासन ने हाल ही में इस रोड की सेफ्टी ऑडिट करवाई थी। जिसमें चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। एनएच-52 पर पिछले 5 साल में 600 में से 317 बड़े सड़क हादसे सीकर सेफ्टी ऑडिट टीम में पीडब्ल्यूडी के 2 अधिशासी अभियंता, सीकर के जिला परिवहन अधिकारी, फतेहपुर सदर थाना प्रभारी सहित 7 लोग शामिल थे। ऑडिट जांच में सामने आया कि पिछले 5 साल में इस रोड पर 600 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, इनमें से 317 बड़े सड़क हादसे हुए थे। जांच में हादसों की मुख्य वजह रोड पर दिनभर हैवी वाहनों का ट्रैफिक और धीमी गति से चलने वाले वाहनों का गलत लेन में चलने को बताया गया है। हाईवे पर डिवाइडर में कई जगहों पर अवैध कट हादसों को दे रहे न्योता जांच में ये भी सामने आया कि हाईवे की रोड किनारों पर नीचे की ओर झुकी हुई है, डिवाइडर में कई जगह अवैध कट हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं। कुछ हिस्सों में मगरमच्छ जैसी दरारें बन गई हैं और सड़क धंस गई है। जांच रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस एक्सीडेंट जोन में साइन बोर्ड्स और किलोमीटर के माइल स्टोन्स को दोबारा रंगने की आवश्यकता है, जंक्शन/क्रॉसिंग अच्छे से विकसित नहीं हैं, गांव/कस्बों में बस स्टॉप नहीं है, व्हाइट लाइन्स धुंधली पड़ गई हैं। जांच रिपोर्ट आने के तीन महीने बाद भी सड़क पर कोई काम नहीं जांच रिपोर्ट आने के 3 महीने बाद भी आज तक इस सड़क पर कोई काम नहीं हुआ और लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। परिवहन विभाग और पुलिस के दावे हैं कि वह सड़क हादसों में कमी लाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन अभी भी टू लेन वाली जगहों पर रोजाना हादसे हो रहे हैं। सीकर जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा ने कहा कि विभागीय स्तर पर सीकर के रामू का बास से भढाडर और फतेहपुर से लक्ष्मणगढ़ को 4 लेन बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
