राजस्थान के जयपुर, अजमेर और ब्यावर में गुलाल के नाम पर पीसे हुए पत्थर में कलर और खुशबू डालकर बेचा जा रहा है। ये पत्थर वाला गुलाल स्किन एलर्जी की वजह बन सकता है। आंखों में चला जाए तो रोशनी जा सकती और सांस के साथ शरीर के अंदर चला जाए तो फेफड़े खराब हो सकते हैं। असली गुलाल अरारोट, टेलकम पाउडर और मैदा से बनता है, जबकि डोलोमाइट, मार्बल सहित कई तरह के पत्थरों के पाउडर में रंग डालकर गुलाल के नाम पर बेच रहे हैं। 7 से 10 रुपए का पत्थर का पाउडर बाजार में 30 से 40 रुपए किलो तक बेचा जा रहा है। भास्कर की 5 दिन की इन्वेस्टिगेशन में ये सच सामने आया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जयपुर: 10 से 12 रुपए किलो में पत्थर पीसकर बनाया गुलाल सूचना मिली थी कि जयपुर के सुदर्शनपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित गुलाल फैक्ट्रियों में मिट्‌टी और केमिकल से गुलाल तैयार किया जा रहा है। भास्कर टीम पहुंची तो कुछ कर्मचारी मशीन से गुलाल बनाकर और पैक कर रहे थे। हमारी मुलाकात फैक्ट्री के अकाउंटेंट से हुई। रिपोर्टर : गुलाल चाहिए, क्या रेट है? अकाउंटेंट : मिट्‌टी वाला है। 10 रुपए किलो भी है और 12 रुपए किलो भी। रिपोर्टर : रेट में कोई गुंजाइश? कौन-कौनसे कलर हैं? अकाउंटेंट : रेट फिक्स है। 4 कलर मिल जाएंगे। इसके बाद उसने अंदर ले जाकर कट्‌टों से निकालकर सैंपल दिखाया। अंदर मशीन में सफेद पाउडर मशीन में डाला जा रहा था। मुनीम के जाने के बाद वहां काम कर रहे लोगों से पूछा तो बोले-मार्बल वाले पत्थर का पाउडर है। अंदर काफी सफेद पाउडर के कट्‌टे रखे थे। सेंट डालते ही महकने लगा नकली गुलाल भास्कर टीम सुदर्शनपुरा में ही दूसरी गुलाल फैक्ट्री में पहुंची। वहां राजेंद्र नाम का आदमी मिला। फैक्ट्री के बाहर सफेद पाउडर के काफी कट्टे और केमिकल के खाली ड्रम थे। (इसके बाद एक कर्मचारी आता है और सैंपल दिखाता है।) (कर्मचारी कुछ देर के बाद दोबारा सैंपल लेकर आता है।) ब्यावर : व्यापारी बोला- गुलाल से एलर्जी की गारंटी नहीं है जयपुर के बाद भास्कर टीम ब्यावर पहुंची। ब्यावर में हर तरह के पत्थर की पिसाई का काम होता है। टीम ने नगर परिषद के पास खंडेलवाल ट्रेडिंग पर एक बड़े व्यापारी से डील की। व्यापारी ने कबूला-पत्थर पीसकर बनाते हैं ब्यावर के अजमेरी गेट से कुछ दूरी पर मोनू होल सेलर नाम से गुलाल और कलर का गोदाम था। (इसी दौरान व्यापारी के पास खड़ा लड़का बोला- सफेद पत्थर को पीसकर बनाते हैं, वह घटिया होता है। परेशानी भी होती है। इस पर व्यापारी ने उसे आंखें दिखाकर चुप करा दिया। लड़का वहां से चला गया।) अजमेर : गुलाल दिखाकर कहा- इसमें सिर्फ रेत होती है इसके बाद भास्कर टीम अजमेर के मुंदरी बाजार पहुंची। एक दुकान के बाहर पिचकारी का स्टॉक रखा था। व्यापारी बोला- सब वैरायटी है अजमेर के मुंदड़ी बाजार में ही एक और व्यापारी के पास भास्कर टीम पहुंची। (इसके बाद व्यापारी ने अरारोट से बने 55, 65 और 85 रुपए किलो भाव के गुलाल भी दिखाए।)
छोटी पैकिंग में सबसे ज्यादा मिलावट अरारोट की भी बना रखी तीन कैटेगरी कई होलसेल डीलर ने ग्राहकों को ठगने के लिए अरारोट के गुलाल की भी 3 कैटेगिरी बना रखी हैं। अधिकारी बेबस, क्योंकि गाइडलाइन तय नहीं ब्यावर सीएमएचओ डॉ. संजय गहलोत का कहना है कि ब्यावर में सबसे ज्यादा गुलाल का उपयोग बादशाह की सवारी में होता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले गुलाल की क्वालिटी को लेकर कमेटी बनती है। वहीं बाजार में बिकने वाले गुलाल को लेकर विभाग की ओर से जागरूकता फैलाई जाती है। केमिकल रंगों का उपयोग नहीं करने के लिए कहा जाता है। सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि गुलाल को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। यह उत्पाद न तो फूल में आता है न ही कॉस्मेटिक में। दो साल में गुलाल को लेकर ब्यावर में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।