मौसम में अचानक आ रहे उतार-चढ़ाव ने शहर के लोगों की सेहत पर भी असर डाल रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। सामान्य दिनों की तुलना में करीब 20 प्रतिशत तक मरीजों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना 500 से 600 मरीज सिर्फ ओपीडी में पहुंच रहे हैं। वरिष्ठ डॉक्टर दिलीप विजय के अनुसार मौसम परिवर्तन के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में सर्दी जुकाम बुखार के मरीज तो आ ही रहे है। लेकिन सामान्यत: 5 से 7 दिन में ठीक होने वाली खांसी अब 10 से 15 दिन तक ठीक नहीं हो रही है। इसके अलावा सर्दी, जुकाम, वायरल बुखार और गले में खराश के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। वहीं बच्चों के निमोनिया और डायरिया के मामलों में भी बढोत्तरी हुई है। छोटे बच्चों में ठंड लगना, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और उल्टी-दस्त की शिकायतें अधिक आ रही हैं। सुबह-शाम ठंडी हवा और दिन में हल्की गर्माहट शरीर के लिए अनुकूल नहीं है। यही वजह है कि वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। डॉक्टर्स का कहना है कि इस मौसम में बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है। बचाव के लिए लोग भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का उपयोग करें, नियमित रूप से हाथ धोएं, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, पौष्टिक आहार लें, बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं। तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ या दस्त की स्थिति में खुद मेडिकल से दवा लेने के बजाय डॉक्टर्स को दिखाए।
