बीकानेर में आज पुष्करणा समाज का ओलिंपिक सावा आयोजित होगा। इसमें सबसे पहले पहुंचने वाले दूल्हे को बाइक दी जाएगी। वहीं, सबसे पहले आने वाले दुल्हन पक्ष को साड़ी और कैश दिया जाएगा। इस साल 150 जोड़े विवाह के बंधन में बंधेंगे। दरअसल,शादी का आर्थिक बोझ अधिक न हो, इसलिय यह सावा 500 सालों से चली आ रही उस परंपरा का हिस्सा है, जिसमें समाज के भीतर होने वाली सभी शादी एक ही दिन होती है। पहले यह आयोजन 4 साल में एक बार होता था। इसके बाद इसे 2 साल में एक बार किया जाने लगा। सावे को लेकर पुराने शहर को विवाह स्थल के रूप में सजाया गया है। कम मेहमान और कम खर्च के साथ शादी ज्योतिष और वास्तुविद राजेश व्यास ने बताया- यह सावा सालों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसमें सभी विवाह एक ही दिन संपन्न कराए जाते हैं। परकोटे के भीतर पूरे दिन विवाह से जुड़ी रस्में और पारंपरिक गतिविधियां होंगी। परंपरा को लेकर अलग-अलग मत हैं, किसी का कहना है यह परंपरा 500 सालों से चली आ रही है, तो कोई कहता है कि 500 सालों से भी पुरानी है। इसका मुख्य उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर शादी का आर्थिक बोझ कम करना है। यहां सीमित मेहमान बुलाए जाते हैं, जिससे खर्च नियंत्रित रहता है। परंपरा निभाने वाले दूल्हों को मिलेंगे पुरस्कार विधायक की ओर से कन्याओं को आर्थिक सहायता ज्योतिष और वास्तुविद राजेश व्यास ने बताया- सामूहिक सावे के अवसर पर बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास की ओर से सभी कन्याओं को 11-11 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी। इसे कन्या सम्मान और सामाजिक सहयोग की पहल माना जा रहा है। सावे को लेकर नगर निगम की ओर से परकोटे में विशेष सजावट करवाई गई है। आचार्यों का चौक, कीकाणी व्यासों का चौक, लालाणी व्यासों का चौक, दम्माणी चौक, मुंधड़ा चौक, हर्षों का चौक, बारह गुवाड़, नत्थूसर गेट और जस्सूसर गेट सहित कई मोहल्लों को सजाया गया है।