सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की टीम ने गुरुवार को त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की धर्मशाला में रेड की। इस रेड में टीम ने बैंकों से लोन लेकर करोंड़ों रुपए की ठगी करने वाले भगोड़े आरोपी संजीव दीक्षित को गिरफ्तार किया है। आरोपी संजीव दीक्षित पिछले तीन दिनों से मंदिर की धर्मशाला में नाम बदलकर रह रहा था। आरोपी जिस कमरे में सो रहा था, उसी के पास वाले कमरे में टीम पूरी रात रुकी थी। सुबह 5 बजे सीबीआई के अधिकारियों ने बांसवाड़ा पुलिस को फोन कर जाब्ता बुलाया और10 साल से फरार आरोपी को गिरफ्तार किया। संजीव ने फर्जी डॉक्यूमेंट पर बैंकों से 20 से 25 करोड़ का लोन लेकर उसे चुकाया नहीं और 10 साल से फरार चल रहा था। ​कमरा नंबर 53 में टीम, 54 में सो रहा था आरोपी दरअसल, सीबीआई टीम को जानकारी मिली थी कि आरोपी संजीव दीक्षित नाम बदलकर त्रिपुरा सुंदरी गया हुआ है। गुरुवार रात 9 बजे टीम पहुंची और पड़ताल की तो पता चला कि संजय भारद्वाज के नाम वे वह 54 नंबर कमरे में रुका हुआ है।​ इस पर टीम ने उसे रात में गिरफ्तार करने की बजाय दिन में पकड़ने का प्लान बनाया। टीम ने आरोपी के पास वाला 53 नंबर रूम बुक किया और वहां रुके। पूरी रात टीम ने उस पर नजर रखी। शुक्रवार अलसुबह 5 बजे सदर थाना पुलिस के जाब्ते के साथ टीम ने धावा बोलकर उसे धर दबोचा। आरोपी के पास से 5 मोबाइल और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए हैं। ​कई नामों से ली ठगी की ‘डिग्री’, पत्नी भी वड़ोदरा से गिरफ्तार ​यूपी के बागपत का रहने वाला संजीव दीक्षित बेहद शातिर है। वह पंकज भारद्वाज और संजय शर्मा जैसे अलग-अलग नामों से फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंकों को चूना लगा रहा था। सीबीआई ने इसी मामले से जुड़े एक अन्य केस में आरोपी की पत्नी आरती शर्मा को भी वड़ोदरा से गिरफ्तार किया है। सीबीआई के अधिकारियों ने आरोपी जहां भी जाता वह अपने आप को ज्योतिष बताता था। इसने कई नामों से फर्जी डॉक्यूमेंट भी बना रखे थे। त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की धर्मशाला में भी ये नाम बदलकर पिछले तीन दिनों से रह रहा था। 2013 में दर्ज हुआ था मामला, 2017 में भगोड़ा घोषित किया ​सदर थाना सीआई रूपसिंह ने बताया कि सीबीआई इंस्पेक्टर रोशनलाल व धनसिंह के नेतृत्व में टीम ने सुबह जाब्ता मांगा था। मंदिर चौकी इंचार्ज नरेश पाटीदार के सहयोग से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद टीम उसे बड़ौदा और फिर दिल्ली लेकर जाएगी। साल 2013 में आरोपी के खिलाफ फर्जी डॉक्यूमेंट से लोन लेना का मामला दर्ज किया था। इसके बाद साल 2014 में सीबीआई ने पहली बार उसे गिरफ्तार किया। साल 2016 में आरोपी सोनीपत पुलिस को कस्टडी में चकमा देकर फरार हो गया था। एक साल तक वह पकड़ा नहीं गया। आखिर 2017 में सीबीआई कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया। आरोपी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में कई मामले दर्ज है। दिल्ली पासिंग नम्बर की कार से आया था आरोपी करोड़ो की ठगी करने वाला शातिर आरोपी दिल्ली पासिंग नम्बरों की कार से त्रिपुरा सुंदरी मंदिर आया था। बताया जा रहा है कि यह कार बीकानेर के व्यक्ति के नाम से पंजीकृत है। कार को सदर थाने में रखवाया गया है।