नागौर जिले के थांवला गांव में इन दिनों राजस्व विभाग के कामकाज को लेकर ग्रामीणों और किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है। स्थानीय पटवारी भागीरथ चौधरी पर किसानों ने पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी पटवार भवन अक्सर बंद रहता है और पटवारी अपने निर्धारित मुख्यालय पर मिलने के बजाय किसानों को निजी आवास पर चक्कर लगवाते हैं। इस संबंध में पीड़ित किसानों ने एक लिखित आवेदन देकर पटवारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने और उन्हें दोबारा निलंबित करने की मांग उठाई है।
निजी आवास से कामकाज और दलालों के जरिए वसूली का आरोप शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पटवारी भागीरथ चौधरी सरकारी कार्यालय में बैठने के बजाय अपने घर से ही कामकाज का संचालन करते हैं। आरोप है कि वहां भी हर किसी किसान को सीधे प्रवेश नहीं मिलता और कुछ खास बिचौलियों के माध्यम से ही बात सुनी जाती है। किसानों का दावा है कि सीमाज्ञान और नामांतरण जैसे जरूरी राजस्व कार्यों के बदले अवैध रूप से पैसों की मांग की जाती है। यदि कोई किसान नियमों का हवाला देकर विरोध करता है, तो उसे राजकार्य में बाधा पहुंचाने का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी जाती है। किसानों ने यह भी बताया कि पटवारी अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर ग्रामीणों को डराते हैं, जिससे क्षेत्र के गरीब किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
पूर्व निलंबन के बाद पुनर्नियुक्ति पर उठे सवाल इस पूरे मामले में सबसे विवादित पहलू पटवारी की कार्यशैली के साथ-साथ उनकी नियुक्ति प्रक्रिया भी रही है। जानकारी के अनुसार, इन्हीं शिकायतों के चलते उन्हें 26 दिसंबर 2023 को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें पुनः उसी हल्का क्षेत्र में पदस्थापित कर दिया गया, जिसे ग्रामीण नियमों के विरुद्ध बता रहे हैं। किसानों का तर्क है कि एक बार गंभीर आरोपों में निलंबित होने के बाद उसी स्थान पर नियुक्ति देने से पटवारी के हौसले और बुलंद हो गए हैं। ग्रामीणों ने पूर्व में उपखंड अधिकारी (एसडीएम) रियांबड़ी को भी इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन वहां से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण अब किसानों में प्रशासन के प्रति भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
