जालंधर जिले में श्री गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में 31 जनवरी को निकलने वाली भव्य शोभायात्रा से पहले जालंधर वेस्ट के बस्ती दानिशमंदा इलाके में माहौल गर्म हो गया है। महीनों से खुदी पड़ी सड़कों और सीवरेज पाइपलाइन के अधूरे काम ने स्थानीय निवासियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। लोगों को डर है कि अगर प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो इस बार शोभायात्रा का पारंपरिक रास्ता बदलना पड़ सकता है। जालंधर वेस्ट के बस्ती दानिशमंदा इलाके में सोमवार दोपहर रास्ते बंद होने के कारण लोग सड़कों पर आ गए। महिलाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों ने आरोप लगाया कि पिछले साल से पाइपलाइन डालने का काम किया जा रहा है, लेकिन अभी तक ये काम पूरा नहीं हुआ। अब ऐसे में श्री गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व ( 31 जनवरी ) के दिन भव्य शोभायात्रा निकालना है, लेकिन अभी तक रास्ते का काम पूरा नही हुआ। सालभर से ‘नर्क’ बनी सड़कें बस्ती दानिशमंदा इलाके में सीवरेज पाइपलाइन डालने का काम पिछले साल मई में शुरू हुआ था। अधिकारियों ने तब दावा किया था कि काम एक महीने में पूरा हो जाएगा, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी सड़कें गहरी खाइयों में तब्दील हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें गवाह हैं कि यह रास्ता पैदल चलने लायक भी नहीं बचा है, जबकि इसी मार्ग से हजारों की संख्या में श्रद्धालु शोभायात्रा में शामिल होते हैं। प्रशासन काे 2 दिन का अल्टीमेटम लोगों के बढ़ते विरोध को देखते हुए संबंधित विभाग के SDO ने स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया है कि अगले 48 घंटों में सड़क निर्माण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, निर्माण की कछुआ चाल को देखते हुए निवासी इस दावे पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दोटूक कहना है कि यदि सड़क ठीक नहीं हुई, तो वे बाबू जगजीवन लाल चौक की ओर से रूट बदलने को मजबूर होंगे। मेयर का पलटवार: “प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित, काम रिकॉर्ड तोड़” इस पूरे विवाद पर मेयर विनीत धीर ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने धरना-प्रदर्शन को विपक्षी दलों की राजनीति करार देते हुए कहा की बस्ती दानिशमंदा में हो रहा विरोध प्रदर्शन पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। जो काम पिछले 20-25 सालों में नहीं हुए, वे आम आदमी पार्टी की सरकार करवा रही है। सीवरेज पाइपलाइन का काम प्रकाश पर्व से पहले हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा ताकि शोभायात्रा के दौरान किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो। एक तरफ प्रशासन इसे विकास का हिस्सा बता रहा है, तो दूसरी तरफ स्थानीय निवासी इसे अपनी धार्मिक आस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन अपने वादे के मुताबिक 2 दिन में सड़कों को दुरुस्त कर पाता है या इस बार प्रकाश पर्व की शोभायात्रा का रास्ता बदल जाएगा।