सीमावर्ती बाड़मेर जिले में मौसम के बदले मिजाज ने जनजीवन काे झकझोर दिया है। गुरुवार को पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश के बाद अब कड़ाके की सर्दी और बर्फीली हवाओं ने पूरे जिले को अपनी आगोश में ले लिया है। शनिवार को न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 5 दिन के अंतराल के बाद 6.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 20.6 डिग्री दर्ज किया गया, वहीं न्यूनतम तापमान 6.7 डिग्री दर्ज किया गया। कड़ाके की इस सर्दी ने ग्रामीण इलाकों में किसानों की चिंता बढ़ा दी है जिससे जीरा और सरसों की फसलों को नुकसान की आशंका है। अधिकतम तापमान 20.6 डिग्री दर्ज किया गया। 108 मिट्टी के घड़ों के पानी से 41 दिन तक रोज अल सुबह स्नान कर रहे मनु महाराज वांकल माता मंदिर दानजी की होदी साधक मनु महाराज ने 41 दिवसीय जलधारा एवं मौन व्रत तपस्या शुरू की है। 108 मिट्टी के घड़ों से प्रभात वेला में स्नान कर तपस्या की जा रही है। यह साधना 19 जनवरी से प्रारंभ होकर 28 फरवरी को गुरु महाराज की आज्ञा से पूर्ण होगी। भास्कर एनालिसिस – सामान्य से 5 डिग्री नीचे पहुंचा पारा, अब फसलों के लिए नुकसानदेह बाड़मेर में सर्दी का सितम इस कदर है कि दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। पिछले पांच दिनों में तापमान में एकाएक गिरावट आने के कारण सर्दी का असर बढ़ गया है। शनिवार सुबह जब ग्रामीण इलाकों में किसान खेतों में पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनकी चिंता बढ़ गई। सर्दी इतनी तीखी थी कि कई जगह पाला जमने की स्थिति बन गई। किसानों के अनुसार जीरे और सरसों पर पाले की मार कर असर नजर आया। इस समय फसलों में फूल और फलियां बन रही है। ऐसे में पाला पड़ने से पैदावार पर सीधा असर होगा। किसानों का कहना है कि अत्यधिक ठंड के कारण पौधों के अंदर मौजूद पानी जम जाता है, जिससे कोशिकाएं फट जाती है और पौधा सूखने लगता है। 26 जनवरी से फिर बदलेगा मौसम मौसम विभाग की माने तो सर्द हवाओं से अभी राहत के आसार नहीं हैं। उत्तरी ठंडी हवाओं के जोर पकड़ने से अगले 48 से 72 घंटों तक ठिठुरन और बढ़ेगी।रविवार को भी जिले में कड़ाके की शीतलहर चलने की संभावना है। 26 जनवरी को एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। 26 से 29 जनवरी के बीच पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। मौसम में आए एकाएक बदलाव के कारण कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को पाले से बचाने के उपाय बताए हैं। उन्होंने किसान भाईयों को सलाह दी है कि पाले से बचाव के लिए शाम के समय खेतों की उत्तर-पश्चिम दिशा में धुंआ करें या हल्की सिंचाई करें।
