सीकर में सालासर रोड आचार्य धर्मसागर महाराज स्मारक का बुधवार को शिलान्यास किया गया। सीकर में 39 साल बाद चातुर्मास कर रहे वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। सीकर में देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जैन बंधु सीकर पहुंचे। शिलान्यास कार्यक्रम से पहले भगवान महावीर चैरिटी ट्रस्ट और प्रबंध समिति के तत्वावधान में दंग की नसियां से आचार्य धर्मसागर समाधि स्थल तक शोभायात्रा निकाली गई। आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आचार्य धर्मसागर स्मारक की शिलान्यास पटि्टका का अनावरण किया और आधारशिला रखी। मुख्य शिलान्यासकर्ता सीकर निवासी व चेन्नई-बंगलौर प्रवासी कमला देवी, पदमचंद-महेंद्र कुमार धाकड़ परिवार थे। शिलान्यास कार्यक्रम से पहले सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान का शुरू हो गए। जीवन में सच्चे गुरु का समझाया महत्व देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने आचार्य वर्धमान सागर महाराज के ससंघ को धोक देकर गुरु पूर्णिमा मनाई। वर्धमान स्कूल के बच्चों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। भगवान दास, बाबूलाल और राजकुमार सेठी ने वर्धमान सागर महाराज को शास्त्र भेंट किए। संचालन डॉ. इंदु जैन और संजय बड़जात्या ने किया। शिखरचंद, कमल कुमार, किशोर कुमार, अजय कुमार व संजय कुमार संगही परिवार महाआरती की। धर्मसभा को संबोधित करते हुए वर्धमान सागर महाराज ने जीवन में सच्चे गुरु का महत्व समझाया। उन्होंने कहा- जैन धर्म में गुरु पूर्णिमा सिखाती है कि ज्ञान तभी फलित होता है, जब इंसान का घमंड जैन धर्मगुरु महावीर स्वामी की तरह खत्म हो जाए। इसी पूर्णिमा के दिन ही भगवान महावीर से दीक्षा ली थी। कार्यक्रम में वर्धमान सागर महाराज के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री का टेलीकास्ट किया गया।
