डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के शल्य तंत्र विभाग द्वारा छह दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के पांचवें दिन शुक्रवार को विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रायोगिक सत्र आयोजित किए गए। कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने बताया कि कार्यक्रम के तहत सर्जिकल लाइव डेमोंस्ट्रेशन एवं प्रैक्टिकल सेशन आयोजित किया गया। इसके साथ ही डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सेवा राम ने कोलोनोस्कोपी एवं सिग्मोइडोस्कोपी के नैदानिक एवं चिकित्सकीय महत्व पर व्याख्यान दिया। महाराष्ट्र के सावंगी, वर्धा स्थित डीएमआईएचईआर के शल्य तंत्र विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शीतल असुटकर ने अर्बुद (नियोप्लाज्म) की शल्य प्रक्रियाओं एवं उनके प्रबंधन विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। आयुर्वेदिक औषधियों के महत्व की दी जानकारी शल्य तंत्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विष्णु दत्त शर्मा ने आयुर्वेद एवं आधुनिक आपातकालीन औषधियां: शल्य चिकित्सा में उपयोग विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने विभिन्न सर्जिकल एवं आपातकालीन परिस्थितियों में आयुर्वेदिक एवं आधुनिक औषधियों के महत्व, उनकी क्रियाविधि, उचित चयन तथा चिकित्सकीय उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी उपचार के लिए औषधियों के विवेकपूर्ण उपयोग पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता शल्य तंत्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार गुप्ता ने की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा की नवीनतम तकनीकों एवं उपचार पद्धतियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सीएमई में विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों, विभाग के संकाय सदस्यों एवं पीजी स्कॉलर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
