अजमेर में सरकारी नाले पर ‘आइलैंड’ बनाने के दैनिक भास्कर एप के खुलासे के बाद अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) ने कमेटी का गठन कर दिया है। तहसीलदार की अध्यक्षता में बनाई गई इस कमेटी को पूरी तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद ADA नियमानुसार कार्रवाई करेगा। अजमेर विकास प्राधिकरण के डिप्टी कमिश्नर (नॉर्थ) जयपालसिंह राठौड़ ने बताया- कमेटी में तहसीलदार के साथ एग्जिक्यूटिव इंजीनियर और असिस्टेंट टाउन प्लानर को शामिल किया गया है। कमेटी 7 दिन में जांच रिपोर्ट देगी। जयपाल सिंह राठौड़ ने बताया- कमेटी जमीन के रिकॉर्ड की जांच करेगी। निर्माण कार्य ले-आउट के अनुसार हुआ है या नहीं, इसकी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस पूरे मामले का खुलासा दैनिक भास्कर ऐप पर 22 जून को ही हुआ था। 340 प्लॉट की कॉलोनी का 60% काम पूरा हो चुका
अजमेर के चाचियावास में ‘जीएस लेक एवेन्यू प्रोजेक्ट’ है, जिसमें सरकारी नाले पर एक ‘आइलैंड’ बना दिया गया है। खुद की जमीन के साथ नाला और अजमेर विकास प्राधिकरण की सरकारी जमीन पर चारदीवारी बनाकर कैद कर लिया। नाले पर आवाजाही के लिए पुलिया बनाने के बजाय सीमेंट के पाइप डालकर सड़क भी बना दी। यहां 340 प्लॉट की इस कॉलोनी का 60 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट की कीमत करोड़ों में है। इसमें नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई, लेकिन अजमेर विकास प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई करना तो दूर काम तक नहीं रोका गया। आज भी यहां काम चल रहा है। भास्कर ने किया पूरे मामले का खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा दैनिक भास्कर एप पर सोमवार सुबह ‘अजमेर में सरकारी जमीन पर अवैध ‘आईलैंड’ बनाया, घर बेचे:नाले के ऊपर सड़क बनाई, करोड़ों रुपए का प्रोजेक्ट, अधिकारी देखते रहे’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर किया। इसके बाद प्राधिकरण ने जांच कमेटी गठित की है। (पूरी खबर पढे़ें) नाले को ‘लेक’ बताकर कैसे बेचे गए घरों के सपने? 1. नाले के बीचों बीच बना दिया आइलैंड कॉलोनी को प्रीमियम लुक देने के लिए यहां बने करीब दस हजार वर्ग मीटर नाले के बीच में एक आइलैंड बना दिया गया। एक बड़ा टीला बनाकर यहां इस पर पेड़ व घास लगाई गई है। जबकि नियम ये है कि किसी भी जलस्रोत व नाले में किसी भी तरह का कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। इस निर्माण से जलभराव व जलबहाव प्रभावित होगा। 2. नाले पर पाइप डालकर बना दी सड़क नाले पर आवाजाही के लिए पुलिया बनाकर सड़क बनाने के बजाय केवल पानी की आवाजाही के लिए पाइप डालकर खानापूर्ति की गई। इससे नाले में पानी का बहाव क्षेत्र प्रभावित होगा। अगर पर्याप्त चौड़ाई के साथ आरसीसी पुलिया का निर्माण होता तो पानी का बहाव भी प्रभावित नहीं होता। लेकिन इसमें कॉलोनाइजर को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते। 3. नाले के बफर जोन में पक्का निर्माण नाले के बफर जोन (जल बहाव क्षेत्र के आसपास का इलाका, जिस पर निर्माण नहीं किया जा सकता) में पक्का निर्माण कर लिया गया। इसके लिए यहां पक्का पाथ-वे बनाकर रेलिंग भी लगा दी। यहां किए गए निर्माण तक आने-जाने के लिए लोहे की पुलिया व रेलिंग भी बना दी। जबकि नाले के नौ मीटर के बफर जोन को पूरी तरह खुला रखना था और इसमें किसी प्रकार का कोई निर्माण नहीं करना था। 4. सरकारी जमीन चारीदीवारी में कैद अजमेर विकास प्राधिकरण के नाम दर्ज खसरा संख्या 2068 की जमीन 1000 वर्ग मीटर और 2088 की 7100 वर्ग मीटर जमीन है। इसके अलावा सरकारी नाले की खसरा संख्या 2069 का क्षेत्रफल 10 हजार वर्ग मीटर है। इन तीनों को भी खुद की जमीन के लिए बनाई गई चारदीवारी में शामिल कर कैद कर लिया।

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