पूर्व सीएम अशोक गहलोत एक दिवसीय दौरे पर सोमवार को जालोर पहुंचे। उन्होंने कहा- वर्तमान सरकार आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पा रही है और धरना-प्रदर्शन करने वालों पर मुकदमे दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। सरकार की सुनने की क्षमता समाप्त हो गई। बालोतरा रिफाइनरी में हाल ही में हुई चूक के कारण ही पीएम का दौरा भी रद्द करना पड़ा। यह बड़ी लापरवाही है, जिससे बड़ी घटना हो सकती थी। हालांकि दिल्ली जाने या राजस्थान में रहने के सवाल पर गहलोत ने मारवाड़ी अंदाज में कहा कि ‘मैं थासू दूर नहीं’ (मैं आपसे दूर नहीं हूं)। राजस्थान की जनता और आलाकमान ने उन्हें 3 बार मुख्यमंत्री और कई बार सांसद-विधायक बनाकर सब कुछ दिया है। वह खुद को देश का सबसे संतुष्ट राजनेता मानते हैं और पार्टी उन्हें संगठन, दिल्ली, जोधपुर या जालोर में जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे वे बिना किसी मांग के स्वीकार करेंगे। पार्टी जिसको मजबूत समझे, उसको आगे लाए। दरअसल, गहलोत जन अभियोग निराकरण समिति के पूर्व अध्यक्ष पुखराज पाराशर के निवास स्थान पर पहुंचे थे, जहां उनके दिवंगत पिता की शोक सभा में शामिल होकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने संजय नगर स्थित कांग्रेस के नए कार्यालय भवन का निरीक्षण भी किया। प्रसूताओं के इलाज में सरकार फेल
कोटा और बीकानेर के बाद जोधपुर के सरकारी अस्पताल में एक साथ 8 प्रसूताओं को इंफेक्शन होने की घटना पर गहलोत ने पीड़ित परिवारों को सरकार से मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मैं पीड़ित परिवारों से मिलकर आया हूं। इस मामले में सरकार फेल हो चुकी हैं। अपनी पुरानी सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि हमने राजस्थान में 25 लाख तक का इलाज और दवाइयां मुफ्त की थीं, जो पूरी दुनिया में बेमिसाल हैं, यहां तक कि अमेरिका में बराक ओबामा की ऐसी ही योजना फेल हो गई थी, लेकिन हमारी योजना बेहद कामयाब रही। ‘रात्री चौपाल’ में जनता नहीं पूछ पा रही सवाल
गहलोत ने मौजूदा सरकार की ‘रात्री चौपाल’ व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि असली चौपाल वह है जहां ग्रामीणों की समस्याओं का सीधा समाधान हो और फीडबैक मिले। कलेक्ट्रेट के अधिकारियों द्वारा बुलाई जाने वाली चौपालों में जनता सवाल नहीं पूछ पाती। उन्होंने नगर निकाय और पंचायत चुनाव न कराने पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनाव में हार का डर है। हाईकोर्ट के आदेश और संविधान का उल्लंघन करने वाली इस सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए। पूर्व सीएम ने राम मंदिर चंदा प्रकरण पर निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है, इसलिए यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो कार्रवाई होनी चाहिए।

You missed