मनरेगा कर्मचारी यूनियन मोर्चा के आह्वान पर कर्मचारियों ने पंजाब सरकार के खिलाफ लुधियाना जिले के खन्ना में श्रम मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध के आवास का घेराव किया। बड़ी संख्या में जुटे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ठेका प्रथा समाप्त करने, कर्मचारियों को नियमित करने और पिछले छह महीनों से लंबित वेतन जारी करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें जल्द नहीं मानीं, तो वे संघर्ष तेज करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि आगामी नगर कौंसिल चुनावों में मनरेगा कर्मचारी आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों, मंत्रियों और विधायकों का गांवों में विरोध करेंगे। कच्चे कर्मचारियों को रेगुलर करने की मांग यूनियन नेताओं ने बताया कि वे कई वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान सरकार और विभागीय अधिकारियों के साथ कई बैठकें हुईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने और ठेका प्रथा समाप्त करने के वादे किए गए थे, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। 17 से 18 वर्षों से नियमितिकरण की देख रहे राह नेताओं ने यह भी बताया कि मनरेगा के तहत कार्यरत कर्मचारी पिछले 17 से 18 वर्षों से नियमित प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती होकर गांवों के विकास कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अभी तक नियमित नहीं किया गया है। उन्होंने जोर दिया कि गांवों में अधिकांश विकास कार्य मनरेगा योजना के तहत ही होते हैं, और ग्रामीण विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। वेतन नहीं मिलने से घर चलाना मुश्किल प्रदर्शनकारियों ने अपनी आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि ग्राम सेवक, एपीओ, कंप्यूटर असिस्टेंट और अन्य कर्मचारियों को पिछले 6 महीनों से वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने के कारण उन्हें घर का खर्च चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, और कई कर्मचारी कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। यूनियन नेताओं ने यह भी बताया कि पंजाब में मनरेगा के तहत लाखों जॉब कार्ड धारक हैं और हजारों कर्मचारी लगातार गांवों के विकास के लिए कार्यरत हैं।
