श्रीगंगानगर में लॉरेंस गैंग के लिए काम करने वाले वांटेड विशाल पचार के घर के आगे NIA ने ढोल बजवाया। उसे सार्वजनिक भगोड़ा घोषित कर घर के आगे नाम के पोस्टर चिपकवाए। इस दौरान कार्रवाई को देखने उसके घर के आगे लोग जमा हो गए। इसके साथ ही, बस स्टैंड, नगर परिषद और शहर के लीला चौक पर भी नाम के पोस्टर चिपकाए। इसमें लिखा- न यह मिल रहा है न कोर्ट में पेश हो रहा है। आरोप है कि पचार लॉरेंस गैंग के लिए पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स मंगवाता था। NIA जयपुर टीम ने शुक्रवार को विशाल पचार के घर पर ये पोस्टर लगाए हैं। पहुंची और बस स्टैंड, नगर परिषद, लीला चौक सहित सार्वजनिक स्थानों पर उसके नाम के पोस्टर चिपकाए गए। विशाल पचार का घर वार्ड नंबर 14 शनि मंदिर के पास है। जानकारी के अनुसार, लॉरेंस गैंग में विशाल को एलेक्स बुलाया जाता है। इसके अलावा भी उसके कई नाम हैं, जैसे- सरदार खान, एसके। देश छोड़ कर भागने का अंदेशा NIA के अधिकारियों के अनुसार, NIA कोर्ट ने विशाल पचार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए कहा- वह कई संगीन धाराओं में आरोपी है। लंबे समय से कोर्ट में पेशी नहीं हो रही और न ही वह पुलिस को मिल रहा है। कोर्ट ने कहा- वह समन से बचने के लिए खुद को छिपा रहा है या देश छोड़कर भाग गया है। पाकिस्तान से मंगवाता था हथियार-ड्रग्स विशाल ने 11 मार्च 2020 को जयपुर से पासपोर्ट (नंबर यू 3101090) बनवाया था। रोहित गोदारा के संपर्क के जरिए वह 2024 में नेपाल रास्ते भारत से फरार हो गया। श्रीगंगानगर के बॉर्डर इलाके की गहरी जानकारी रखने के कारण लॉरेंस गैंग ने उसे बॉर्डर एरिया में नेटवर्क खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी। विशाल ने पाकिस्तान के ड्रग्स और हथियार तस्करों से सीधा संपर्क बनाया। बॉर्डर से सटे गांवों में अपना नेटवर्क तैयार किया। बचपन के दोस्त देवेंद्र भांभू (फायरमैन) को गैंग में शामिल किया। सुनसान खेतों में पाकिस्तान से पैकेट गिरवाए जाते है, जिससे विशाल सप्लाई करता है। बाद में पंजाब के बॉर्डर एरिया में नेटवर्क का विस्तार किया। कौन है मास्टरमाइंड विशाल पचार? ये नाम हाल ही में NIA की एक चार्जशीट में पहली बार सामने आया था। विशाल ने 13 साल की उम्र में पहला क्राइम किया। एक-एक कर 11 वारदातों में उसका नाम आया। डेढ़ साल पहले नेपाल के रास्ते विदेश भाग गया। पाकिस्तान के बड़े तस्करों से उसका कनेक्शन है। उसकी गैंग पाकिस्तान से हथियारों और ड्रग्स मंगवाकर अलग-अलग लोकेशन पर छिपाकर रखती है। देशभर में बड़ी वारदात को अंजाम देने से पहले शूटरों तक उनकी डिलीवरी करती है। विशाल के पिता इंद्राज पचार शराब के ठेके पर सेल्समैन का काम करते थे। विशाल भी वहां चला जाता था। शराब ठेके पर पंजाब और हरियाणा के कई गैंगस्टर आते थे। यहीं से उसकी दोस्ती गैंगस्टर से होने लग गई। पहली बार गंगानगर पुलिस ने विशाल को जुआ खेलते हुए 2013 में पकड़ा था। तब यह नाबालिग होने के कारण कोर्ट ने 100 रुपए का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था। विशाल के खिलाफ धमकी देने, फिरौती मांगने के राजस्थान और पंजाब में करीब 11 मुकदमे दर्ज हैं। कुछ मामलों में चालान पेश हो चुका है। विशाल पर श्रीगंगानगर पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम रखा हुआ है। इंटरपोल को भी रेड कॉर्नर नोटिस दिया जा चुका है। इंटरपोल की मदद विशाल पचार को पकड़ने के लिए पुलिस अब इंटरपोल की मदद ले रही है। उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी है। 2022 के आसपास से वह लॉरेंस गैंग से पूरी तरह जुड़ चुका था।