नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) से ठीक एक दिन पहले अजमेर में पेपर बेचने का एक मामला सामने आया है। डीएवी (DAV) कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष एवं एबीवीपी (ABVP) प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण सिंह ठाकुर ने पुलिस प्रशासन को इस संबंध में शिकायत दी है। मामले में वीडियो कॉल पर प्रश्न पत्र दिखाकर रुपये मांगने के आरोप लगे हैं। कृष्ण सिंह ठाकुर ने बताया- डीएवी कॉलेज की प्रथम वर्ष की एक छात्रा के मोबाइल पर अज्ञात नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि मेरे पास नीट परीक्षा का पूरा पेपर मौजूद है। वह परीक्षा से पहले इसे उपलब्ध करा सकता है। जब छात्रा ने इससे जुड़ा सबूत मांगा, तो आरोपी ने वीडियो कॉल कर कथित प्रश्न पत्र दिखाया। छात्रा ने इसकी जानकारी दी। इसके बाद मैंने ने स्वयं उस नंबर पर संपर्क किया। आरोपी ने नीट का पूरा पेपर देने के बदले ₹30 हजार की मांग की। रुपए ट्रांसफर करने के लिए उसने फोन-पे (PhonePe) का क्यूआर स्कैनर भी भेज दिया। आरोपी अपनी पहचान छिपाते हुए केवल वीडियो कॉल के माध्यम से ही बातचीत कर रहा था। एसपी उषा यादव ने मामले को लेकर कहा- वीडियो कॉल के जरिए पेपर बेचने का मामला संज्ञान में आया है। इस मामले में जांच (इन्वेस्टिगेशन) जारी है।
कई छात्रों के झांसे में आने की आशंका छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्ण सिंह ठाकुर ने दावा किया कि अजमेर में कई छात्र इस प्रकार के झांसे में आकर अपने पैसे गंवा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इसी तरह का एक मामला भीलवाड़ा में भी सामने आया है, जहां छात्रों से ₹4-4 हजार लेकर पेपर उपलब्ध कराने का झांसा दिया गया। प्रारंभिक तौर पर यह किसी संगठित ठगी गिरोह की गतिविधि प्रतीत हो रही है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं से पहले भोले-भाले अभ्यर्थियों को निशाना बनाता है। पुलिस को दी शिकायत, जांच शुरू मामले की गंभीरता को देखते हुए कृष्ण सिंह ठाकुर ने अजमेर के एडिशनल एसपी हिमांशु जांगिड़ से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और उपलब्ध साक्ष्य सौंपे हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब संबंधित मोबाइल नंबर, फोन-पे (PhonePe) क्यूआर कोड और वीडियो कॉल के जरिए दिखाए गए कथित प्रश्न पत्र की सत्यता की जांच की जा रही है। छात्रों से अपील- किसी भी झांसे में न आएं छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्ण सिंह ठाकुर ने नीट (NEET) परीक्षा देने वाले सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के पेपर लीक या प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने के दावे पर बिल्कुल विश्वास न करें और किसी को भी पैसे ट्रांसफर न करें। छात्र अपनी मेहनत पर भरोसा रखें और ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑफर की सूचना तुरंत पुलिस और साइबर सेल को दें। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कहीं यह किसी बड़े पेपर लीक गिरोह का हिस्सा तो नहीं है, या फिर प्रतियोगी परीक्षार्थियों से ठगी करने का कोई नया साइबर तरीका है।