राजस्थान में नदी पर बने सबसे लंबे हाई लेवल गहलोद ब्रिज का आज लोड टेस्ट किया जा रहा है। टोंक में बनास नदी पर बने पुल की मजबूती की जांच की जाएगी। 243 टन वजन के 9 ट्रक 24 घंटे तक खड़े किए जाएंगे। इसके बाद एक-एक घंटे के अंतराल में ट्रकों को हटाकर देखा जाएगा। पुल, वजन हटने के बाद यदि 85 प्रतिशत तक अपने मूल स्तर पर लौट आता है तो इसे गुणवत्ता पूर्ण निर्माण माना जाएगा। पुल करीब 135 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। ब्रिज से टोंक आने-जाने में 30 किलोमीटर तक का चक्कर कम लगेगा। बारिश के समय भी रास्ता बंद नहीं होगा। लोड टेस्ट 30 मई तक चलेगा। इस दौरान आवागमन बंद रहेगा। वाहनों को वैकल्पिक झिराना-सोहेला मार्ग से निकाला जा रहा है। पहले दिन हुआ टेम्प्रेचर टेस्ट, पुल के नीचे लगाई मशीनें PWD के XEN नागेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि गहलोद पुल के लोड टेस्ट की प्रक्रिया मंगलवार सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई। पहले दिन पुल पर आवागमन रोककर दोपहर में टेम्प्रेचर टेस्ट किया गया। इसके लिए पुल के नीचे विशेष मशीनें लगाई गई हैं, जो हर घंटे तापमान के अनुसार बिना लोड के पुल के झुकाव की निगरानी कर रही हैं। यह प्रक्रिया बुधवार की सुबह तक चली। हर घंटे 27 टन का एक ट्रक, कुल 9 ट्रकों से होगी जांच जूनियर इंजीनियर(J.En) ताराचंद बैरवा ने बताया कि बुधवार से हर घंटे 27 टन वजन वाला एक ट्रक(डंपर) पुल पर खड़ा किया जा रहा है। इसी क्रम में कुल 9 ट्रकों को अलग-अलग अंतराल में पुल पर खड़ा किया जाएगा। इस दौरान पुल की मजबूती, भार वहन क्षमता और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। 24 घंटे तक पुल पर खड़े रहेंगे ट्रक, फिर शुरू होगा हटाने का क्रम 9 ट्रकों को पुल पर 24 घंटे तक खड़ा रखा जाएगा। इसके बाद गुरुवार से ट्रकों को क्रमवार हर एक घंटे में हटाया जाएगा। इस दौरान अधिकारी यह रिकॉर्ड करेंगे कि ट्रकों के वजन से पुल कितने सेंटीमीटर झुका और वजन हटने के बाद उसमें कितनी रिकवरी हुई। 85 प्रतिशत रिकवरी पर ही माना जाएगा बेहतर निर्माण जांच का सबसे अहम पहलू पुल की रिकवरी क्षमता है। यदि ट्रकों का भार हटाने के बाद पुल 85 प्रतिशत तक अपने मूल स्तर पर वापस आ जाता है तो निर्माण को बेस्ट क्वालिटी माना जाएगा। वहीं 85 प्रतिशत से कम रिकवरी होने पर निर्माण गुणवत्ता को कमजोर माना जाएगा। चार में बनकर हुआ तैयार PWD के XEN नागेंद्र सिंह परिहार ने बताया- पुल केंद्र और राज्य सरकार के फंड से चार साल में बना है। 2021 में इसकी स्वीकृति मिली थी। करीब पांच महीने पहले काम पूरा हो गया था। अब लोड टेस्ट के बाद आवागमन सुचारू रूप से शुरू कर दिया जाएगा। PWD के XEN नागेंद्र सिंह परिहार ने बताया- पुल बनने से अब टोंक के टोडारायसिंह, मालपुरा, पीपलू और अजमेर की सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इससे इन बड़े शहरों के यात्रियों को करीब 30 किलोमीटर तक की दूरी की बचत होगी। अभी तक बारिश के दिनों में बनास नदी में पानी भरने पर वाहनों को टोंक से जयपुर-कोटा नेशनल हाईवे-52 होते हुए सोहेला गांव के रास्ते मालपुरा, डिग्गी, लावा, केकड़ी और अजमेर तक जाना पड़ता था, जिससे अतिरिक्त दूरी और समय लगता था। लेकिन अब पुल बनने के बाद यातायात सीधा गहलोद गांव के रास्ते सुगम और सीधा हो जाएगा।