45 साल पहले पेट भरने के लिए जो हाथ दूसरे के सामने फैलते थे, आज उन्हीं हाथों में देश का प्रतिष्ठित ‘पद्मश्री’ सम्मान है। यह सम्मान मिलने के बाद राष्ट्रपति भवन में चांदी के बर्तनों में खाना खाया। प्रधानमंत्री ने पास आकर पूछा कैसे हैं आप? वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई दी। हम बात कर रहे हैं अलवर निवासी गफरुद्दीन मेवाती की, जिन्हें 25 मई को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। कभी भीख मांगने को मजबूर गफरुद्दीन आज देश-दुनिया में अलवर का नाम रोशन कर रहे हैं। ये 45 देशों में भपंग बजा चुके हैं। गफरुद्दीन मेवाती ने लंदन में क्वीन एलिजाबेथ के जन्मदिन की पार्टी में ऐसा समां बांधा कि एक अंग्रेज महिला खुद को रोक नहीं पाई और उन्हें कसकर गले लगा लिया। पद्मश्री मिलने के बाद गफरुद्दीन जब दिल्ली से अलवर लौटे, तो उनका गाजे बाजे के साथ स्वागत किया गया। भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने राष्ट्रपति भवन के उन पलों को साझा किया, जो उनके लिए किसी सपने जैसे थे। जब राष्ट्रपति भवन में वीआईपी के बीच बैठे गफरुद्दीन गफरुद्दीन ने बताया कि अवार्ड लेते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उनके पास आए और बेहद आत्मीयता से हाथ मिलाकर पूछा- कैसे हैं आप? इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई दी। पदमश्री सम्मान मिलने के बाद वीआईपी लोगों के साथ खाना खाने का अवसर मिला। गफरुद्दीन मेवाती ने कहा कि अवार्ड सेरेमनी के बाद मुझे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बगल की टेबल पर बैठकर खाना खाने का मौका मिला। मुझे इतना मान-सम्मान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की बदौलत मिला। उस पल मुझे ऐसा महसूस हो रहा था मानो मैं सोने-चांदी के बर्तनों में खाना खा रहा हूं। भपंग सुनकर भावुक हो गई थी अंग्रेज महिला गफरुद्दीन ने अपने विदेशी दौरों का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। करीब 12 साल पहले उन्हें लंदन में क्वीन एलिजाबेथ के जन्मदिन की पार्टी में परफॉर्म करने का मौका मिला था। उन्होंने भपंग की ऐसी तान छेड़ी कि वहां मौजूद विदेशी मेहमान मंत्रमुग्ध हो गए। गफरुद्दीन ने बताया- मेरी प्रस्तुति खत्म होते ही एक अंग्रेज महिला इतनी भावुक और प्रभावित हुई कि उसने दौड़कर मुझे कसकर गले लगा लिया। ढाई हजार दोहे याद हैं भपंग वादन के साथ-साथ गफरुद्दीन लोक गाथाओं के भी ‘इंसाइक्लोपीडिया’ हैं। उन्हें महाभारत लोक गाथा के करीब 2500 दोहे मुंहजुबानी याद हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने पूरी ऊर्जा के साथ एक दोहा गाकर भी सुनाया। उन्होंने कहा कि यह कला ही उनकी पूंजी है और इसी ने उनका पूरा जीवन बदल कर रख दिया।