राजस्थान के धोरों में सूरज आग उगल रहा है। तापमान 45 डिग्री पार पहुंच चुका है। भीषण गर्मी और लगातार रिकॉर्ड तोड़ते तापमान के बीच इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों और पशुओं का जीवन भी संकट में है। सूरज की तपिश के बीच बेजुबान जीव पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं, ऐसे में जैसलमेर के सम क्षेत्र के गांगा, नीम्बा, भगवानाराम की ढाणी सहित आसपास के इलाकों में सामुदायिक एकजुटता ने इन्हें बचाने की ठानी है। पर्यावरणविद और राजस्थान के ग्रीनमैन के नाम से चर्चित नरपतसिंह राजपुरोहित और ‘ग्रीन डेजर्ट संस्थान’ ने संयुक्त पहल की है, जिसके तहत इलाके में बने जल कुंडों में जनसहयोग से पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा है। इस पहल में ‘मुसा डेजर्ट नेस्ट’ ने भी अपना सहयोग दिया है। मकसद है कि भीषण गर्मी में पानी के कुंड भरे रहे और वन्यजीव व पशु- पक्षी प्यास से दम न तोड़े। जल कुंडों की ग्रामीण लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं और जिस भी कुंड भी पानी की कमी दिखाई देती है, वहां टैंकर के जरिए पानी भरा जा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट… पारंपरिक बेरियां सूख गई, वन्यजीव भटक रहे
ग्रामीणों का कहना है- रेगिस्तानी इलाकों में इस बार भीषण गर्मी पड़ रही है। पारंपरिक जल स्रोत, टोबा और बेरियां समय से पहले पूरी तरह सूख चुकी हैं। इससे राष्ट्रीय मरु उद्यान (DNP) क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले सैकड़ों आवारा पशु, चिंकारा (हिरण), मरुस्थलीय लोमड़ी और दुर्लभ पक्षी प्यास से बेहाल होकर पानी की तलाश में भटक रहे हैं। कई बार पानी न मिलने के कारण इन बेजुबानों की मौत तक हो जाती है, जिससे पूरा परिस्थिति तंत्र बिगड़ जाता है। तीन गुना बढ़े टैंकर के दाम
इस रेतीले इलाके में जल सेवा की राह आर्थिक रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण है। भीषण गर्मी और मांग बढ़ने के कारण सम क्षेत्र के विभिन्न गांवों और ढाणियों में खारे पानी की एक टंकी (टैंकर) करीब 700 रुपए में पहुंच रही है। जबकि वन्यजीवों के पीने योग्य मीठे पानी की टंकी की कीमत 1500 से लेकर 2000 रुपए तक वसूल की जा रही है। पानी के दाम आसमान छूने के बावजूद ग्रामीणों ने हौसला नहीं खोया है। स्थानीय लोगों के आपसी सहयोग और दान के दम पर लगातार जलकुंडों और टंकियों के माध्यम से पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की जा रही है। ग्रामीणों और संस्थाओं का मिला संयुक्त साथ
वन्य जीवों की असहनीय हालत को देखते हुए मुहिम को शुरू किया गया। इसके तहत स्थानीय ग्रामीण और ढाणियों के लोगों ने अपने सीमित संसाधनों से बेजुबानों के लिए पानी जुटाने के प्रयास शुरू किए हैं। ‘मुसा डेजर्ट नेस्ट’ ने भी सहयोग किया है, जिससे धोरों में बने जलकुंडों तक पानी के टैंकर पहुंचाए जा रहे हैं। सामूहिक प्रयासों से अब तक कई सूखे पड़े जलकुंडों में मीठा पानी डलवाया जा चुका है। इससे वन्यजीवों को राहत मिली है। अधिक से अधिक जल व्यवस्था करने की अपील
‘ग्रीनमैन’ नरपतसिंह का कहना है कि यह संकट काल है, ऐसे में उन्होंने सभी से बेजुबानों के लिए अधिक से अधिक सहयोग करने की अपील की है। ग्रीन डेजर्ट संस्थान टीम के अनुसार- थार की जैव-विविधता को बचाना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों से आग्रह किया गया है कि वे अपने स्तर पर भी घरों, खेतों और ढाणियों के आसपास छोटे-छोटे बर्तनों और खेलियों में पानी की नियमित व्यवस्था रखें, जिससे भीषण गर्मी के इस दौर में किसी भी बेजुबान जीव को प्यासा न रहना पड़े। पर्यावरण संरक्षण के लिए साइकिल से की 30 देशों की यात्रा
मूल रूप से बाड़मेर के रहने वाले पर्यावरणविद नरपतसिंह राजपुरोहित पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए देश के 29 राज्यों में 30 हजार किलोमीटर से अधिक की साइकिल यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान देशभर में लाखों पौधे लगाए हैं और लोगों को पेड़ बचाने के लिए प्रेरित किया है। इसी वजह से उन्हें पूरे देश में ‘ग्रीनमैन’ के नाम से जाना जाता है। साइकिल यात्रा पूरी करने के बाद अब वे पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल में सक्रिय हैं। ‘ग्रीन डेजर्ट संस्थान’ के माध्यम से वे जैसलमेर और बाड़मेर के सुदूर रेगिस्तानी इलाकों में भीषण गर्मी के दौरान वन्यजीवों के लिए पानी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में जुटे हैं।
