सुपरस्टार रजनीकांत की रोबोट मूवी से इंस्पायर होकर नागौर जिले के दो स्कूली स्टूडेंट्स ने ह्युमेनाइड रोबोट रक्षक 1.0 तैयार किया है। इसे प्रोग्राम करने और एआई से जोड़ने के लिए दोनों स्टूडेंट्स ने यूट्यूब से पायथन और C++ जैसी कंप्यूटर लेंग्वेज भी ऑनलाइन सीखी। खास बात यह है कि रोबोट की आंखों में कैमरे लगे हैं, जो लाइव रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। पॉवर सप्लाई के लिए कंप्यूटर में यूज होने वाला SMPS काम में लिया है। जबकि 3D प्रिंटर से रोबोट की प्लास्टिक बॉडी प्रिंट करवाई गई है। दरअसल, जिले के कुचेरा के रहने वाले यश शर्मा और नीरज सैनी 9वीं और 11वीं क्लास के स्टूडेंट्स हैं। दोनों दोस्त है। दोनों ने रजनीकांत की रोबोट मूवी देखी तो रोबोट बनाने का आईडिया आया। दो साल पहले दोनों ने मिलकर कार्ड बोर्ड से एक रोबोट खेल खेल में तैयार किया, जिसे कम्प्यूटराइज नाम दिया था। इसके बाद दोनों ने यूट्यूब के जरिए कोडिंग लेंग्वेज सीखी और डेढ़ साल की मेहनत के बाद रक्षक 1.0 का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया। ऑनलाइन ली कोडिंग लैंग्वेज की क्लास
यश के पिता जयप्रकाश डिस्कॉम में टेक्निशियन के पद पर कार्यरत हैं। वहीं नीरज के पिता जीतेन्द्र सैनी भी डिस्कॉम में टेक्निशियन हैं। दोनों मीडिल क्लास परिवार से होने के कारण बड़ा फंड नहीं था। लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी। ह्यूमेनाइड रोबोट की प्रोग्रामिंग और इसे AI से जोड़ने के लिए यूट्यूब का सहारा लिया। पढ़ाई के बाद समय मिलने पर पायथन और C++ जैसी कंप्यूटर लेंग्वेज ऑनलाइन सीखी। रोबोट का सॉफ्टवेर भी दोनों बच्चों ने ऑनलाइन जानकारी जुटाकर तैयार किया। दोनों ने बताया कि परिवार और रिश्तेदारों की मदद और अपनी पॉकेटमनी बचाकर करीब डेढ़ साल के पीरियड में लगभग 80 हजार रुपए लगा चुके हैं। ज्यादा फंड नहीं होने से रोबोट में कई जुगाड़ टेक्निक का भी यूज किया गया। जैसे रोबोट की आंखों में कैमरे वेब कैमरे लगाए हैं, जो लाइव रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। रोबोट के जॉइंट्स में कई जगह बड़े लोहे के स्क्रू लगाए गए हैं। पॉवर सप्लाई देने के लिए भी कंप्यूटर में यूज होने वाला SMPS काम में लिया गया है। रोबोट की बॉडी 3D प्रिंटर से तैयार करवाई गई। दोनों बच्चों के पिता का कहना है कि दोनों शुरुआत से ही टेक्निकल कामों में ज्यादा इंट्रेस्ट लेते रहे हैं। शुरुआत में तो हमें समझ ही नहीं आया कि दोनों आखिर कर क्या रहे हैं? लेकिन जब इनका रोबोट तैयार हुआ तो हमें विश्वास हुआ कि यह अपना रास्ता खुद बना लेंगे। हम इनकी ज्यादा आर्थिक मदद तो नहीं कर पाए, लेकिन विश्वास है कि एक दिन दोनों मंजिल जरूर हासिल करेंगे। छत पर बने कमरे को बनाया लैब
यश ने बताया कि शुरुआत में कई दिक्कतें आई। अब हम आगे जाकर अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। हम ऐसे रोबोट बनाना चाहते हैं, जो सेना के काम आ सके। इसके अलावा फैक्ट्रीज में और घरों में काम आने वाले रोबोट भी हम बनाना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए हमें फंडिंग की जरूरत है। नीरज का कहना है कि हम चाहते हैं कि हमें एक लैब की भी जरूरत है। अभी हम यश के पापा के सरकारी क्वार्टर के ऊपर बने एक छोटे से रूम में अपना काम कर रहे हैं। दोनों दोस्तों का कहना है- इस बार हमारे बोर्ड एग्जाम हैं, इस वजह से हम इसे ज्यादा समय नहीं दे पाएंगे, लेकिन हम धीरे धीरे इसे डेवलप कर लेंगे। हमारे पास फंड हो तो प्लास्टिक पार्ट्स की बजाय हम मेटल यूज करना चाहेंगे। इसके अलावा अभी इसे कंप्यूटर से कंट्रोल कर रहे हैं, लेकिन इसे हम सेल्फ AI रोबोट बनाना चाहते हैं। हर सवाल का देता है सटीक जवाब
यश और नीरज ने बताया कि अभी रक्षक 1.0 रोबोट के पैर नहीं है, इसे वॉइस कमांड से ऑपरेट कर सकते हैं। इसमें AI इस्तेमाल किया है। हम कोई भी सवाल करें, तो यह हमें सटीकता से जवाब भी यह देगा।
फ्यूचर में इसे क्लासरूम के लिए भी उपयोग लिया जा सकता है। अभी यह हाथ में कुछ भी हेंडल कर सकता है। इसके अलावा सामने खड़े व्यक्ति की लाइव रिकॉर्डिंग इसके पास रहती है। मोशन सेंसर की वजह से हर एक्टिविटी को यह डिटेक्ट कर सकता है। दोनों का कहना है कि अभी रक्षक 1.0 का प्रोटोटाइप तैयार किया है। हम दोनों चाहते हैं कि सरकार या किसी भी तरह से कोई हेल्प मिले तो हम इसे और बेहतर बना सकते हैं।