मोगा के सरकारी अस्पताल (सिविल अस्पताल) में डॉक्टरों की कथित बड़ी लापरवाही के चलते एक 21 वर्षीय नवविवाहिता की मौत का बेहद दुखद मामला सामने आया है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के परिजनों और गांव खोसा पांडे के निवासियों ने अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्य गेट के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच की जाए, दोषी डॉक्टरों पर पर्चा दर्ज हो और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। उधर प्रशासन और परिजनों समझौते का प्रयास हुआ। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों के बोर्ड का गठन का जांच कराने की है। सिजेरियन डिलीवरी के दौरान ‘नस’ काटने का आरोप पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गांव खोसा पांडे की रहने वाली सुखप्रीत कौर (21) को 24 जून को प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) होने के कारण मोगा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मृतका के परिवार का सीधा आरोप है कि सिजेरियन (ऑपरेशन) डिलीवरी के दौरान ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने घोर लापरवाही बरतते हुए महिला के गर्भाशय की एक मुख्य नस काट दी। नस कटने के कारण सुखप्रीत कौर की हालत बेहद गंभीर हो गई और शरीर से अत्यधिक खून बहने लगा। स्थिति हाथ से निकलती देख डॉक्टरों ने उसी दिन आनन-फानन में उसे गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट रेफर कर दिया।
फरीदकोट मेडिकल कॉलेज में भी हुई बेरुखी, 1 जुलाई को तोड़ा दम मृतका के बेबस पति जसकरण सिंह ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि जब हम फरीदकोट मेडिकल कॉलेज पहुंचे, तो वहां भी डॉक्टरों ने शुरुआत में मेरी पत्नी को भर्ती करने से साफ मना कर दिया। काफी मिन्नतें करने और राजनीतिक/सामाजिक दबाव के बाद उसे दाखिल तो किया गया, लेकिन समय पर सही इलाज न मिलने के कारण 1 जुलाई को जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए उसने दम तोड़ दिया।” मौत के 4 दिन बाद भी नहीं हुआ पोस्टमार्टम, प्रशासन मौन परिजनों ने रोष जताते हुए कहा कि सुखप्रीत की मौत हुए आज चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक संवेदनहीनता का आलम यह है कि न तो अभी तक शव का पोस्टमार्टम करवाया गया है और न ही पुलिस या प्रशासन का कोई अधिकारी उनकी बात सुनने आया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय मिलने का कोई आश्वासन तक नहीं दिया जा रहा है।
