तीन महीने तक बीमारी के कारण बिस्तर पर रहने के बावजूद कोटा में जेईई की तैयारी कर रहे छात्र गुंजन कुमार ने हार नहीं मानी और IIT दिल्ली में प्रवेश हासिल कर प्रेरणादायक मिसाल पेश की। इस कठिन दौर में उसकी मां गुंजा ने गुरु की भूमिका निभाई। उन्होंने ऑनलाइन क्लास देखकर खुद नोट्स तैयार किए और बेटे की पढ़ाई में लगातार मदद की। मां के समर्पण और बेटे की मेहनत ने आखिरकार IIT दिल्ली तक का सपना साकार कर दिया। दरअसल, परीक्षा से पहले फेफड़ा कोलैप्स होने के कारण बिहार के सीतामढ़ी निवासी गुंजन कुमार तीन महीने तक क्लास नहीं जा सका। इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान उसकी मां का रहा, जो बेटे की पढ़ाई में उसकी सहपाठी बन गईं। फेफड़ा कोलैप्स के कारण तीन महीने बिस्तर पर रहा गुंजन कुमार ने बताया कि जेईई की तैयारी के लिए कोचिंग में पढ़ने कोटा आया था। लेकिन परीक्षा से कुछ महीने पहले उसे न्यूमोथोरेक्स यानी फेफड़ा कोलैप्स होने की गंभीर समस्या हो गई। करीब तीन महीने तक वह बिस्तर पर रहा और नियमित कक्षाएं नहीं ले सका। ऐसे मुश्किल समय में उसकी मां ने उसका हौसला नहीं टूटने दिया। उन्होंने ऑनलाइन क्लास देखीं, खुद नोट्स तैयार किए और उसे पढ़ाया, ताकि उसकी तैयारी प्रभावित न हो। जेईई मेन में 91.8 पर्सेंटाइल की हासिल गुंजन कुमार ने बताया कि उसकी आंखों की रोशनी भी 70 प्रतिशत से अधिक कमजोर है और वह 9.5 नंबर का चश्मा लगाता है। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी। जेईई मेन में 91.8 पर्सेंटाइल हासिल की, जबकि जेईई एडवांस्ड में पीडब्ल्यूडी ओबीसी श्रेणी में 50वीं और कॉमन पीडब्ल्यूडी रैंक 120 प्राप्त की। उन्होंने बताया कि अब वह आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस शाखा में प्रवेश लेकर अपना सपना पूरा करने जा रहा है। गुंजन ने अपनी सफलता का श्रेय मां और शिक्षकों को दिया। बेटे का सपना ही मां का सपना वहीं मां गुंजा ने कहा कि बेटे का सपना ही उनका सपना था, इसलिए उन्होंने वर्षों बाद फिर से पढ़ाई शुरू की। कोचिंग के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि गुंजन की कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियों में परिवार का साथ, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास किसी भी चुनौती को सफलता में बदल सकते