राजस्थान से सटी 1,070 किलोमीटर लंबी भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा का चक्रव्यूह अब पूरी तरह बदल गया है। सरहद पर अब ‘भैरव बटालियन’ के साथ ‘अशनी ड्रोन प्लाटून’ (ड्रोन टुकड़ी) को तैनात किया गया है। यह नई जुगलबंदी न सिर्फ जासूसी करेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों को तबाह भी कर देगी। भारतीय सेना का लक्ष्य 2027 तक देश की सभी 350 से ज्यादा इन्फैंट्री बटालियनों को इसी तरह हाई-टेक ‘ड्रोन वॉरियर’ बनाने का है। बटालियन के साथ तैनात ये वेपन ड्रोन 24 घंटे बॉर्डर की निगरानी करेंगे। खास बात यह है कि स्पेशल ऑपरेशन में ये ड्रोन टुकड़ी आसमान से भैरव बटालियन के साथ शामिल होगी। इन ड्रोन्स को सैनिकों की विशेष टुकड़ी ऑपरेट करेगी। हर टुकड़ी में 25 ट्रेंड जवान हैं, जो अंधेरे और हर तरह के मौसम में भैरव फोर्स को ये ड्रोन प्लाटून प्रोटेक्ट करेंगे। अब दुश्मन को टारगेट कर खत्म करना आसान होगा, और पैदल सेना के लिए खतरा कम होगा। जासूसी के साथ दुश्मन पर हमला करने में सक्षम राजस्थान में भारत-पाक सीमा लगभग 1,070 किलोमीटर लंबी है। जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और बीकानेर सेक्टरों में इनकी तैनाती की गई है। सीमा से 35 किलोमीटर तक अंदर किसी भी दुश्मन ड्रोन या उड़ने वाली वस्तु को ट्रैक कर नष्ट करने में सक्षम हैं। इससे अब पूरी सीमा 24 घंटे रडार और ड्रोन की निगरानी में रहेगी। ये ड्रोन न केवल जासूसी करेंगे, बल्कि इनमें ‘लोइटर म्यूनिशन’ की सुविधा है, जो जरूरत पड़ने पर खुद एक मिसाइल बनकर दुश्मन पर भी गिर सकते हैं। भैरव बटालियन से क्या है कनेक्शन? भैरव बटालियन भारतीय सेना की एक खास यूनिट है, जिसे रेगिस्तान जैसे इलाकों में तेजी से हमला करने और छापामार तरीके से लड़ाई करने के लिए बनाया गया है। इस तकनीक में सेना के जवान दुश्मन पर अचानक हमला कर वापस लौट जाते हैं। इस बटालियन में राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के सैनिकों को ज्यादा शामिल किया गया है, ताकि उन्हें वहां के मौसम और जमीन की पूरी जानकारी हो और वे कठिन परिस्थितियों में आसानी से काम कर सकें। अब अशनी ड्रोन प्लाटून को इस बटालियन से जोड़ने का मकसद इसे ‘हवाई आंखें’ देना है। यानी जहां सैनिक सीधे नहीं पहुंच सकते, वहां ड्रोन पहले पहुंचकर दुश्मन की लोकेशन, उसकी गतिविधियों और हथियारों की जानकारी तुरंत हेडक्वार्टर तक भेज देंगे। अब तक 15 भैरव बटालियनें तैयार
भैरव बटालियन, स्पेशल फोर्सेज और रेगुलर इन्फैंट्री के बीच एक पुल का काम करेंगी। इसके गठन के पीछे मकसद स्पेशल फोर्सेज को ज्यादा अहम लक्ष्यों को पाने के लिए आजादी देना है। यह बटालियन सेना की नई, छोटी और हाईटेक लड़ाकू यूनिट हैं। इसमें शामिल जवान इन्फैंट्री (पैदल सेना), आर्टिलरी (तोपखाना), एयर डिफेंस (हवाई सुरक्षा), सिग्नल (संचार) और दूसरी सपोर्ट यूनिट्स से लिए जाते हैं। देश की पैरा स्पेशल फोर्सेज की तरह इस बटालियन के जवान दुश्मन के इलाके में बहुत अंदर तक जाकर बड़े मिशन पूरे कर सकते हैं। भैरव बटालियन की तैनाती सीमा क्षेत्रों के करीब की गई हैं। इसके जवानों को बड़ी टुकड़ियों का इंतजार किए बिना लड़ने के लिए कूच करने के लिए तैयार किया जाता है। अब तक करीब 15 भैरव बटालियनें तैयार हो चुकी हैं। अंधेरे में भी साफ देखती है अशनी ड्रोन प्लाटून 25 से 30 सैनिकों की छोटी यूनिट है, जो सभी तरह के ड्रोन चलाती है। ये ड्रोन रात के अंधेरे में भी साफ देख सकते हैं। ये इतने स्मार्ट हैं कि अगर कोई दूसरा ड्रोन बॉर्डर पार करने की कोशिश करेगा, तो ये उसे तुरंत पकड़ लेंगे और मार गिराएंगे। इनका लक्ष्य 2027 तक पूरी सेना को इस तकनीक से जोड़ना है। सेना का ‘ड्रोन वॉरियर प्रोजेक्ट’ ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन के हवाई खतरों को नाकाम करने में ड्रोन की बड़ी भूमिका रही। अब भारतीय सेना ड्रोन युद्ध के लिए तैयार हो रही है। 2027 तक देश की सभी 380 पैदल सेना बटालियन को ड्रोन सैन्य टुकड़ी (अशनी ड्रोन प्लाटून) से जोड़ा जाएगा। इसके बाद लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊंचाई वाले सीमावर्ती इलाकों में भी तैनात किया जाएगा। —- यह खबर भी पढ़िए… सेना बोली- ऑपरेशन सिंदूर में 100+ पाकिस्तानी जवान मारे गए:ऑपरेशन अभी भी जारी, पहलगाम जैसा हमला दोबारा नहीं होने देंगे ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। यह अभियान अंत नहीं, बल्कि शुरुआत थी। पूरी खबर पढ़िए जैसलमेर-बॉर्डर पर सेना ने दुश्मन के ठिकानों पर मचाई तबाही:हेलिकॉप्टर से उतरे जवान,एआई से टारगेट पर हमला; तीनों सेनाओं का ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ जैसलमेर के रेगिस्तान में बने दुश्मन के ठिकानों पर बुधवार को भारतीय सेना के जवानों ने हेलिकॉप्टर से उतरकर तबाही मचाई। ध्रुव, रूद्र, चेतक और चीता हेलिकॉप्टर ने जवानों को कवर दिया। जवानों ने अचूक निशाना लगाया और दुश्मन का खात्मा कर दिया। पूरी खबर पढ़िए