भरतपुर। करीब 25 साल पहले मानसिक अवसाद के चलते घर से बिछड़ी एक मां जब अचानक अपने बच्चों के सामने पहुंची तो भावनाओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि हर आंख नम हो गई। जिन बेटियों की विदाई वह कभी नहीं देख सकी और जिस बेटे ने मां का साया बचपन में ही खो दिया था, वह शुक्रवार को अपना घर आश्रम में उनसे लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ा। बरसों के इंतजार, दर्द और अधूरी यादों के बीच हुआ यह मिलन न सिर्फ एक परिवार के पुनर्मिलन की कहानी है, बल्कि उम्मीद, ममता और रिश्तों की अटूट ताकत की मार्मिक मिसाल भी बन गया।
