बारां में चोरी हुई बाइक का बीमा क्लेम देने से इनकार करना नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को महंगा पड़ा है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए ब्याज सहित क्लेम राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक संताप और परिवाद खर्च के रूप में भी 8 हजार रुपए देने होंगे। परिवादी मोनू सुमन निवासी कवाई सालपुरा (अटरू) ने 9 अक्टूबर 2022 को बाइक खरीदी थी। इसका बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था। 24 अगस्त 2024 की रात चोर उसके धर के अंदर खड़ी बाइक चुरा ले गए। कंपनी ने देरी का हवाला देकर क्लेम देने से किया था इनकार
परिवादी ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और बाद में एफआईआर दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) भी पेश कर दी थी। इसके बाद मोनू सुमन ने बीमा कंपनी से बाइक की 57,201 रुपए की आईडीवी राशि का क्लेम मांगा। हालांकि, कंपनी ने नियमों और शर्तों के उल्लंघन और सूचना देने में देरी का हवाला देकर क्लेम देने से इनकार कर दिया। इससे परेशान होकर परिवादी ने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली। सुनवाई के दौरान आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के विभिन्न निर्णयों का हवाला दिया। आयोग ने कहा कि यदि वाहन चोरी की घटना वास्तविक है और पुलिस को समय पर सूचना दी गई है, तो केवल तकनीकी आधार पर बीमा क्लेम पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। मानसिक संताप के रूप में 8 हजार रुपए भी देने होंगे
आयोग ने इस मामले को नॉन-स्टैंडर्ड क्लेम मानते हुए 25 प्रतिशत राशि की कटौती कर शेष क्लेम देने का आदेश दिया। आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार एवं सदस्य अनिल शर्मा ने अपने फैसले में बीमा कंपनी को निर्देशित किया। कंपनी को 57,201 रुपए की बीमित राशि में से 25 प्रतिशत कटौती कर शेष राशि परिवादी को अदा करनी होगी। इसके साथ ही परिवाद दायर करने की तिथि से भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज 5 हजार रुपए मानसिक संताप और 3 हजार रुपए परिवाद व्यय के रूप में भी अदा करने का आदेश दिया गया है।