डीडवाना जिले में ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर के निर्देश पर बुधवार को ‘साइबर जागरूकता दिवस’ मनाया गया। इस दौरान जिलेभर में पुलिस टीमों ने स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचकर आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को साइबर ठगों के नए-नए तरीकों से अवगत कराया और सतर्क रहने की सलाह दी। विशेष रूप से छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं के नाम पर टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर ‘फर्जी पेपर’ देने के लालच से सावधान किया गया।
अभियान के तहत AI तकनीक का उपयोग कर चेहरा और आवाज बदलकर की जाने वाली धोखाधड़ी, साथ ही फर्जी लोन ऐप्स के बढ़ते खतरों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। जागरूकता अभियान के दौरान पुलिस की अलग-अलग टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को जागरूक किया। जसवंतगढ़ और लाडनूं में डिफेंस अकादमियों व विद्यालयों में छात्रों को डिजिटल सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। निंबी जोधा, मौलासर और कोयल ग्राम में ग्रामीणों को बैंकिंग फ्रॉड से बचने के उपाय बताए गए। कुचामन सिटी और परबतसर में ‘कालिका टीम’ तथा स्थानीय पुलिस ने गेमिंग फ्रॉड और साइबर बुलिंग के बारे में जानकारी दी। चितावा क्षेत्र के संगम शिक्षा निकेतन में विद्यार्थियों को साइबर हेल्पलाइन 1930 की उपयोगिता समझाई गई। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी कि साइबर अपराधी अब गरीब लोगों और छात्रों के बैंक खाते किराए पर लेकर उनमें ठगी की रकम ट्रांसफर कर रहे हैं। ऐसा करना कानूनन अपराध है और खाताधारक के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। मोबाइल गुम होने पर CEIR पोर्टल के माध्यम से उसे ब्लॉक करने की सलाह भी दी गई। पुलिस ने बताया कि प्रत्येक माह के प्रथम बुधवार को ‘साइबर जागरूकता दिवस’ मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति साइबर ठगों का शिकार न बने।
