झालावाड़ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकता को देखते हुए जिला प्रशासन ने 53 गांवों में श्मशान भूमि आरक्षित की है। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ के निर्देश पर की गई इस पहल से संबंधित गांवों में लंबे समय से महसूस की जा रही श्मशान भूमि की कमी दूर होगी। ग्रामीणों को अब अंतिम संस्कार के लिए उचित और स्थायी स्थान उपलब्ध हो सकेगा। आठ तहसीलों के गांव शामिल आरक्षित की गई श्मशान भूमि की सूची में जिले की आठ तहसीलें शामिल हैं। इनमें पचपहाड़, पिड़ावा, सुनेल, खानपुर, बकानी, मनोहरथाना, गंगधार और डग के कुल 53 गांव शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा 35 गांवों में श्मशान के लिए भूमि पचपहाड़ तहसील में आरक्षित की गई है। पिड़ावा में 3, सुनेल में 4, खानपुर में 2, बकानी में 2, मनोहरथाना में 3, गंगधार में 2 और डग तहसील में 2 गांवों के लिए भूमि आरक्षित की गई है। ग्राम पंचायतों की मांग के आधार पर कार्रवाई जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन की मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता से पूरा कर रहा है। ग्राम पंचायतों से प्राप्त मांगों और स्थानीय आवश्यकता के आधार पर श्मशान भूमि आरक्षित की गई है। इससे ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए स्थायी सुविधा मिल सकेगी। जनहित के मामलों में तत्परता के निर्देश कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को जनहित से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस पहल से 53 गांवों के ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही श्मशान भूमि की आवश्यकता का समाधान हो सकेगा। खाद के लिए नहीं लगानी पड़ेगी लंबी लाइन, मोबाइल से होगी बुकिंग मोबाइल से घर बैठे बुकिंग की तैयारी किसानों को यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए लंबी कतारों और दुकानों के चक्कर से राहत देने के लिए कृषि विभाग ऑनलाइन खाद बुकिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत किसान ‘एफएफएस’ (फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल) मोबाइल ऐप के जरिए नजदीकी दुकान चुनकर खाद की बुकिंग कर सकेंगे। फार्म आईडी से तय होगी खाद की जरूरत संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि फार्म आईडी के आधार पर ऐप किसान की फसल और जमीन के अनुसार आवश्यक खाद तथा उसकी मात्रा की जानकारी देगा। इससे जरूरत के अनुसार खाद की खरीद सुनिश्चित करने के साथ अनावश्यक खरीद और खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। 614 दुकानें ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ीं जिले में कुल 710 खाद-बीज दुकानों में से 614 दुकानें ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ चुकी हैं। ऐप पर संबंधित दुकानों का उपलब्ध स्टॉक और खाद के प्रकार की जानकारी लाइव मिल सकेगी। इससे किसान बुकिंग से पहले नजदीकी दुकान पर उपलब्ध खाद की जानकारी ले सकेंगे। 400 से अधिक विक्रेताओं को प्रशिक्षण खानपुर, अकलेरा, मनोहरथाना, असनावर और झालरापाटन क्षेत्र के 400 से अधिक खाद विक्रेताओं को ऑनलाइन व्यवस्था के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विभाग इस व्यवस्था को अधिक से अधिक दुकानों और किसानों तक पहुंचाने की तैयारी में जुटा है। 2.18 लाख किसानों की फार्म आईडी तैयार जिले में अब तक 2.18 लाख किसानों की फार्म आईडी तैयार हो चुकी है। कृषि विभाग ने शेष किसानों से भी फार्म आईडी बनवाने की अपील की है, ताकि वे ऑनलाइन खाद बुकिंग व्यवस्था का लाभ उठा सकें। आगे होम डिलीवरी मॉडल पर भी काम कृषि विभाग भविष्य में खाद की होम डिलीवरी मॉडल पर भी काम कर रहा है। ऑनलाइन बुकिंग और उपलब्ध स्टॉक की लाइव जानकारी मिलने से किसानों को खाद के लिए अनावश्यक रूप से दुकानों के चक्कर लगाने और लंबी कतारों में खड़े होने से राहत मिलने की उम्मीद है।