नमस्कार पूर्व मुख्यमंत्रीजी ने केंद्रीय मंत्री को मशवरा दिया कि कभी साथ चाय पीते तो काम कराने के गुर सिखा देता। भाजपा संगठन के मुखियाजी अब भगवा रंग की ईवी कार से ईंधन बचाएंगे। जयपुर में एक पंप पर पेट्रोल की कम सप्लाई के चलते हो-हंगामा हो गया और एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी की दरियादिली ने मन छू लिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. पूर्व CM बोले-मंत्रीजी ‘चाय’ पी लेते पूर्व मुख्यमंत्रीजी जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचे। जोधपुर पहुंचने के बाद उनके चेहरे पर चमक आ जाती है। अपना क्षेत्र है। पत्रकारों ने वहीं घेर लिया। पत्रकारों ने पेट्रोल-डीजल और निकाय चुनाव जैसे सवाल उछाले। पूर्व सीएम जानते थे कि वे लंबा बोलने वाले हैं। पहले पानी पिया। फिर बोलना शुरू। उन्होंने कहा- इनकी नीयत खराब है। हाईकोर्ट चुनाव की 2 बार कह चुका। हमें भी चुनाव कराने पड़े थे। चाहते तो हम भी कोई बहाना ढूंढ लेते। ये डरे हुए हैं कि साफ हो जाएंगे। स्थिति गंभीर है। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रीजी का जिक्र किया। नाम लिए बिना कहा- ये मंत्रीजी हैं न आपके। ये 10 साल में 2-3 बार मेरे साथ चाय पी लेते तो मैं इन्हें सुझाव देता कि काम कैसे कराए जाते हैं। उन्होंने पुराने दिन याद करते हुए कहा- हमारे समय में क्या नहीं हुआ? लोग मांगते नहीं थे उससे पहले तो काम हो जाते थे। ये (मंत्रीजी) अपने आपको तीस मारखां समझते होंगे। इसलिए सलाह नहीं करते। हम भी एमपी थे। ये बात करते। बात करते, चाय पर बुलाते तो हम भी अनुभव शेयर करते। जोधपुर का भला होता। ये मीठी बातें करते हैं। 12 साल में क्या उपबल्धि है। कुल मिलाकर सफेद कुर्ते पर सफेद सदरी पहने पूर्व सीएम जंच रहे थे। नेहरूजी की पुण्यतिथि के मौके पर उनका ‘चाचा नेहरू’ वाला अवतार भी दिखा। एयरपोर्ट पर छठी क्लास की एक बच्ची से उन्होंने संवाद किया। पूछा- मुझे जानती हो? बच्ची बोली- हां जानती हूं। वे बोले- कैसे जानती हो? बच्ची बोली- आप ओल्ड सीएम हो। ओल्ड सीएम समेत सभी हंसने लगे। 2. संगठन के मुखियाजी की ‘भगवा’ कार पुराने जमाने की कहावत है- यथा राजा, तथा प्रजा। आधुनिक समय में कहा जा सकता है- यथा सरकार, तथा कार। यूं तो ईंधन की कमी को देखते हुए काफिला कम करना और इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी ईवी में सफर करना समय की मांग है। सीएम भी ईवी में चलने लगे। संगठन के मुखियाजी कैसे पेट्रोल वाली गाड़ी में चलें? तो उनके लिए भी ईवी की व्यवस्था कर दी गई। चमचमाती ईवी को लेकर सारथी जब मुखियाजी के पास पहुंचा तो संगठन के पदाधिकारियों की आंखों में चमक आ गई। कार का रंग भगवा। कार की कार, पार्टी का प्रचार। मुखियाजी फूले नहीं समाते हुए कार में समाए। महामंत्रीजी ने अर्जी लगाई-भाईसाहब ये गाड़ी फिर बाद में महामंत्रियों के पास रहेगी। मुखियाजी उनकी बात को हंसी में लपेटकर अपने काम पर निकल गए। पदाधिकारी ललचाई नजरों से ओझल हो जाने तक गाड़ी की दमक निहारते रहे। 3. पेट्रोल पंप पर तू-तू मैं-मैं ईंधन बचाने के संदेश के इतर लोग ईंधन की सप्लाई से जूझते पंपों पर झिक-झिक कर रहे हैं। सरकार में ऊपर से नीचे तक बड़े-बड़े नेतागण कार छोड़ ईवी पर आ गए। केंद्रीय मंत्री ई-रिक्शे पर आ गए। प्रशासन के बड़े बड़े अफसर साइकिल से ऑफिस पहुंच रहे हैं। कई तो ऐसे हैं जिन्होंने पैदल चलने की आदत डाल ली है। इसके बावजूद लोगों को पेट्रोल चाहिए। इन्हें पता नहीं कि पंप वालों ने हड़ताल की चेतावनी दे रखी है। वे खुद परेशान हैं। सप्लाई कम आ रही है। जयपुर में जल महल के सामने पैदल भ्रमण करने के लिए सुंदर पाल बनी हुई है। फिर भी पेट्रोल भरवाने के लिए एक युवक बाइक लेकर जल महल के सामने वाले पेट्रोल पंप पर पहुंच गया। यहां एक ही फ्यूल स्टेशन पर पेट्रोल दिया जा रहा था। बाकी बंद थे। युवक ने पंप कर्मचारी से बहस करना शुरू कर दिया। बोला- पेट्रोल पंप तेरा है क्या? तू मालिक है क्या? एक ही फ्यूल स्टेशन से पेट्रोल क्यों दे रहे हो? बाकी के बंद क्यों हैं? क्या दादागिरी मचा रखी है? सवाल अंतर्राष्ट्रीय स्तर के थे। इनका जवाब आधिकारिक रूप से ट्रंप, खामेनेई या नेतन्याहू ही दे सकते थे। ऐसे में पेट्रोल पंपकर्मी को भी जवाब देने के बजाए बहस करने में ज्यादा सहूलियत महसूस हो रही थी। युवक ने जितने देर बहस की, उतनी देर लाइन में लगता तो नंबर आ गया होता। 4. चलते-चलते.. ऊपरी शक्तियों में विश्वास करने वाले लोग चौराहों से बचकर चलते थे। वे कहते थे कि चौराहों पर डर रहता है। कालान्तर में भी चौराहों से बचकर निकलने की परंपरा कायम रही। चौराहों पर अब चालान कटने का डर रहता है। जयपुर के एक चौराहे पर ट्रैफिक कर्मी लाखनलाल जी ड्यूटी पर थे। दोपहर का वक्त। पारा 45 डिग्री का आंकड़ा छू रहा था। नौतपा कहर बरपा रहा था। लाखनलाल जी ने देखा कि चिलचिलाती धूप में बाइक सवार तपता हुआ चौराहे की तरफ आ रहा है। उन्होंने हाथ का इशारा कर बाइक रुकवाई। बाइक सवार को पेड़ की छाया में आने का इशारा किया। बाइक सवार को एक पल के लिए उन कहानियों पर यकीन हुआ, जिसमें चौराहों पर भूत होने का दावा किया जाता था। घबराते हुए उसने बाइक छाया में लगाई। लाखनलाल जी ने कहा- भीषण गर्मी है। क्या कहते हैं। युवक बोला- गर्मी तो तेज ही है। लाखनलाल जी ने कहा- आपको छाछ पिलाते हैं। छाछ का पैकेट लाया गया। युवक की ओर बढ़ाते हुए लाखनलाल जी ने कहा- छाछ पीजिए और कुछ देर छाया में विश्राम कीजिए। युवक इस अप्रत्याशित घटना से अभिभूत था। वह मन ही मन विचार करते हुए आगे बढ़ा- चौराहों पर कभी-कभी देवता भी भटकते हैं। बात खरी है में तो गर्मी के यही रंग है। बाकी जोधपुर में मिर्ची बड़ा के दीवानों पर 46 डिग्री सेल्सियस का भी कोई असर नहीं। दैनिक भास्कर एप पर यह खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- ग्राउंड रिपोर्ट इनपुट सहयोग- अंकित ढाका (जोधपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।