सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक और एक पुलिस अधिकारी के बीच कथित बातचीत के वायरल ऑडियो मामले को लेकर अब रिटायर्ड पुलिसकर्मियों ने भी खुलकर नाराजगी जताई है। रिटायर्ड पुलिस कल्याण संस्थान एवं पेंशनर समाज के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। संगठन का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर वायरल हो रहे ऑडियो और उससे जुड़े आरोपों ने पुलिस विभाग के सम्मान और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने आना जरूरी है ताकि लोगों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे और कानून पर भरोसा बना रहे। पुलिस की गरिमा से जुड़ा बताया मामला रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश उपाध्याय ने कहा कि ऑडियो और सार्वजनिक चर्चाओं में यह आरोप सामने आए हैं कि एक मंत्री द्वारा पुलिस अधिकारी के प्रति अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक अधिकारी का नहीं बल्कि पूरे पुलिस विभाग की गरिमा का मामला है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था बनाए रखने का काम करते हैं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। किसी भी जनप्रतिनिधि या उच्च पद पर बैठे व्यक्ति से यह उम्मीद की जाती है कि वह संविधान, कानून और प्रशासनिक मर्यादाओं का पालन करे तथा अपने आचरण से सकारात्मक उदाहरण पेश करे। ऑडियो की फॉरेंसिक जांच की मांग संस्थान ने पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो और वीडियो की वैज्ञानिक तरीके से फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सामने आई सामग्री असली है या नहीं। संगठन का मानना है कि तकनीकी जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा। इससे मामले की सच्चाई सामने आएगी और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होगा। सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों ने कहा कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि जनता के बीच भी उसका संदेश सकारात्मक रूप से जाए। आरोप सही मिलने पर कार्रवाई की मांग सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान ने यह भी कहा कि यदि जांच में मंत्री पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। संगठन का मानना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए, चाहे कोई आम नागरिक हो या फिर किसी बड़े पद पर बैठा व्यक्ति। साथ ही उन्होंने मांग की कि जांच पूरी होने तक मंत्री को पद से अलग रखा जाए ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़े। इसके अलावा संबंधित पुलिस अधिकारी को राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव से सुरक्षित रखने की भी मांग उठाई गई है। संगठन का कहना है कि निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई से ही लोगों का भरोसा प्रशासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर मजबूत बना रहेगा।
