कोटा यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार चंबल के मीठे पानी को कैंपस तक लाने का 10 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। पानी की विशाल टंकी बनकर तैयार है, पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और सिस्टम की टेस्टिंग भी पूरी तरह सफल रही है। लेकिन इस गर्मी और उमस के बीच यूनिवर्सिटी के छात्रों को यह पानी सिर्फ इसलिए नसीब नहीं हो रहा है, क्योंकि सिस्टम को अब तक एक ‘उद्घाटन की तारीख’ का इंतजार है। यूनिवर्सिटी कैंपस में बनाई गई इस पानी की टंकी का उद्घाटन पहले 9 जुलाई को होना संभावित था, लेकिन किन्हीं अज्ञात कारणों से यह कार्यक्रम टल गया। आज भी यूनिवर्सिटी के करीब 1500 नियमित छात्र में बोरवेल का खारा पानी पीने को मजबूर हैं। कोटा यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 2003 में हुई थी। स्थापना के बाद से ही कैंपस में मीठे पानी की किल्लत बनी हुई है। छात्रों की मांग है कि उद्घाटन के वीआईपी कल्चर को छोड़कर तुरंत पानी की सप्लाई शुरू की जाए।
पथरीली जमीन का खारा पानी और 10 करोड़ का चंबल प्रोजेक्ट कोटा यूनिवर्सिटी में कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ और सवाई माधोपुर के करीब 213 से अधिक कॉलेज जुड़े हैं, जिनमें नामांकित छात्रों की कुल संख्या 3 लाख से अधिक है। यूनिवर्सिटी कैंपस की जमीन पथरीली होने के कारण यहां का ग्राउंड वॉटर (भूजल) बेहद खराब और खारा है, जिससे कैंपस के पेड़-पौधे तक सूख जाते हैं। समस्या के स्थायी समाधान के लिए अकेलगढ़ वाटर फिल्टर प्लांट से यूनिवर्सिटी कैंपस तक पानी पहुंचाने के लिए 10 करोड़ रुपए से अधिक का बजट मंजूर किया गया था। पीएचईडी (PHED) और यूनिवर्सिटी के आपसी तालमेल से अब यह काम पूरा हो चुका है। मुख्य ओवरहेड टैंक (पानी की टंकी) बनकर तैयार है, डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और पानी का प्रेशर व लीकेज जांचने के लिए टेस्टिंग का काम भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। आगामी सप्ताह में उद्घाटन की पूरी उम्मीद यूनिवर्सिटी के कुलगुरू प्रो. बी.पी. सारस्वत के अनुसार, 23 साल के लंबे इंतजार के बाद यूनिवर्सिटी को चंबल का मीठा पानी मिलने जा रहा है। पाइपलाइन बिछने के बाद उसकी टेस्टिंग और चेकिंग का काम भी सफलतापूर्वक कर लिया गया है। पहले इसका उद्घाटन 9 जुलाई को होना संभावित था, लेकिन कुछ कारणों से यह नहीं हो सका, अब आगामी सप्ताह में इसके उद्घाटन की पूरी उम्मीद है। छात्रों को नलकूप का पानी, स्टाफ के लिए रोज आते हैं 100 कैंपर हालांकि, इस उद्घाटन के इंतजार के बीच कैंपस के भीतर पानी को लेकर एक ‘दोहरा सिस्टम’ चल रहा है। छात्रों के लिए लगे वॉटर कूलर्स में आज भी नलकूप (बोरिंग) का खारा पानी आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और स्टाफ के लिए रोज बाहर से 100 से अधिक पानी के कैंपर मंगवाए जाते हैं। दोपहर होते-होते ये कैंपर भी खत्म हो जाते हैं, जिसके बाद स्टाफ को भी पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।
