राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव का शेड्यूल जारी कर दिया है। जिले में दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण में 9 सितंबर को और दूसरे चरण में 11 सितंबर को वोटिंग होगी। निगम चुनाव के लिए 11 सितंबर को वोटिंग होगी। चुनाव परिणाम 14 सितंबर को आएगा। वहीं मेयर और नगर पालिका व नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर को होगा। नगरीय निकायों के उपाध्यक्ष और उप महापौर का चुनाव 22 सितंबर को होगा। पार्षद जनता के वोट से चुने जाएंगे, जबकि मेयर–डिप्टी मेयर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए पार्षदों के बीच वोटिंग होगी। कोटा नगर निगम के 100 वार्डों के लिए 721 मतदान केंद्र होंगे। पार्षद के लिए दो चरण में कब-कहां वोटिंग कोटा में नगर निगम में 8.24 लाख वोटर्स कोटा में दोनों ही बड़ी पार्टियों के दावेदार सामने आने लगे हैं। भाजपा-कांग्रेस ने पार्षदों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। इस बार शहर की सरकार चुनने के लिए 8.24 लाख वोटर्स अपने मत का प्रयोग करेंगे। कोटा में अब तक महापौर पद पर बीजेपी का चेहरा ही नजर आया है। हालांकि पिछले चुनाव में दो निगम होने और क्रॉस वोटिंग होने से कांग्रेस को फायदा मिला था। दोनों निगम, कोटा उत्तर और दक्षिण में कांग्रेस ने अपने मेयर बना लिए थे। बीजेपी के पास भी कोई बड़ा चेहरा नहीं कोटा दक्षिण को भाजपा का पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है। निगम चुनाव में अब तक ज्यादातर बीजेपी के ही मेयर चुने गए हैं। पिछली बार कोटा दक्षिण और उत्तर दो निगम थे। इस बार एक ही निगम है, लेकिन बीजेपी में चुनावी रणनीति का केंद्र कोटा दक्षिण का ही एरिया रहेगा। पिछले चुनाव में मिली हार के बाद इस बार भाजपा के सामने अपना किला फतह करने की बड़ी चुनौती है। हालांकि यहां बगावत जैसी स्थिति पार्टी में नहीं है। लेकिन बीजेपी के पास भी कोई बड़ा चेहरा मेयर पद के लिए नहीं है। कोटा जिले से सरकार में दो-दो कैबिनेट मंत्री, स्थानीय विधायक और लोकसभा अध्यक्ष का प्रभाव क्षेत्र है। ऐसे में हर बड़े नेता की अपनी पहली पसंद और समर्थक को मैदान में उतारने की मंशा होगी। पिछले चुनाव में कोटा उत्तर में भाजपा की गुटबाजी खुलकर सामने आई थी, जहां 70 में से केवल 14 सीटें मिलने पर पार्टी एकतरफा हार गई थी। कांग्रेस की गुटबाजी और बगावत की चुनौती पिछली बार बाड़ेबंदी, निर्दलीयों को साधने और सटीक रणनीति के दम पर कांग्रेस ने कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण दोनों निगमों में अपना बोर्ड बनाकर इतिहास रचा था, लेकिन इस बार चुनौतियां कम नहीं हैं। निगम एक हो चुका है। इसके अलावा पार्टी के अंदर अलग-अलग धड़े हैं। कोटा में कांग्रेस की बगावत सड़कों पर भी आ चुकी है। कांग्रेस में भी स्थानीय स्तर पर बड़े नेताओं के अपने-अपने धड़े और वफादार कार्यकर्ता हैं। ओबीसी महिला सीट रिजर्व होने के बाद हर धड़ा अपने समर्थक को टिकट दिलाने के लिए जोर आजमाइश करेगा। यहां कोटा उत्तर से विधायक शांति धारीवाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनका पार्टी के अंदर भी वर्चस्व है। इधर, प्रहलाद गुंजल पार्टी में भीड़ जुटाने वाले नेता माने जाते हैं। उनका धड़ा भी अलग काम कर रहा है। वहीं शहर जिलाध्यक्ष राखी गौतम दक्षिण से आती है। वार्ड कम होने और लॉटरी के बाद दिग्गजों की जमीन खिसकी 150 वार्डों से घटकर 100 वार्ड रह जाने के कारण कई पुराने पार्षदों के टिकट कटना तय है। ऐसे में बागी उम्मीदवार और निर्दलीय प्रत्याशी खेल बिगाड़ सकते हैं। पिछली बार भी निर्दलीय पार्षदों और क्रॉस वोटिंग के चलते बीजेपी के मेयर नहीं बन सके थे। इस बार दोनों ही पार्टीयों के खास चेहरों की जमीन खिसकी है। परिसीमन के बाद वार्ड बदले हैं और इसके अलावा लॉटरी के बाद स्थितियां बदली है। चौथी बार महिला को कमान कोटा नगर निगम के इतिहास में यह चौथी बार होगा, जब शहर की कमान महिला के हाथ होगी। इस बार महापौर का पद ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित तय किया गया है। कोटा नगर निगम के 100 वार्डों के लिए 721 मतदान केंद्र होंगे। इनमें कुल 8,24,491 वोटर होंगे। इनमें 4.18 लाख पुरुष और 4.05 लाख महिला वोटर्स शामिल हैं। पिछली बार कोटा उत्तर सीट पर मेयर पद के लिए एससी महिला सीट रिजर्व थी, जबकि कोटा दक्षिण सामान्य थी। इस बार इन 100 सीटों में से 20 वार्ड ओबीसी के लिए रहेंगे। इनमें ओबीसी के 13 और ओबीसी महिला के 7 वार्ड हैं। वहीं कुल 57 वार्ड जनरल के हैं, जिनमें 19 वार्ड जनरल महिला के लिए हैं। जानिए निगम में कौनसा वार्ड किसके लिए आरक्षित
