रोजगार और परिवार का भविष्य संवारने के लिए आर्मेनिया गए रोपड़ जिले की नंगल की झौला बस्ती निवासी मुकेश कुमार का शव भारत सरकार के सहयोग से उनके पैतृक गांव पहुंचा। मंगलवार को नम आंखों से उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके करीब छह वर्षीय बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी। मुकेश अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गए हैं। मुकेश के मामा जनक चंद ने बताया कि मुकेश करीब तीन साल पहले रोजगार की तलाश में आर्मेनिया गए थे। वहां 24 सितंबर को अचानक तबीयत बिगड़ने से उनकी मौत हो गई। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया और परिवार को इस दुखद घटना की जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने एकत्रित किया चंदा परिवार को बताया गया कि मुकेश का शव भारत लाने के लिए करीब 4 हजार अमेरिकी डॉलर यानी 4.50 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इतनी बड़ी राशि जुटाना मुश्किल था। इसके बाद गांव के लोगों ने अपने स्तर पर पैसे एकत्र करने शुरू किए, लेकिन आवश्यक राशि का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। रकम कम पड़ने पर सरकार की सहायता ली इस बीच ब्राह्मण सभा जिला रूपनगर के अध्यक्ष रमन शर्मा ने पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा से संपर्क किया। उनके प्रयासों के बाद भारत सरकार ने अपने खर्च पर मुकेश का शव भारत लाने की सहमति दी। परिजनों के अनुसार, इस संबंध में प्रयास शुरू होने के पांच दिनों के भीतर ही मदद का रास्ता साफ हो गया। मंगलवार को मुकेश का शव उनके गांव पहुंचा, जहां अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। परिजनों ने बताया कि मुकेश की भारत लौटने की योजना भी इसी दिन की थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी असमय मौत से परिवार और गांव में शोक की लहर है।