राजसमंद. धार्मिक नगरी चारभुजाजी में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा सबसे अलग है। यहां रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले नहीं बनाए जाते, बल्कि जवाहर मैदान में उनकी प्रतिमाएं बनाकर गोलियों और पत्थरों से जमींदोज किया जाता है। वर्षों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा को देखने आस पास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। सरगरा समाज के प्रतिनिधि मांगीलाल सरगरा ने मैदान में तीनों की प्रतिमाएं बनाई गईं। रावण का मुखौटा मटके को फोड़कर तैयार किया गया और उसकी नाभि में मटका रखकर रंग-रोगन किया गया। इसके बाद रावण वध की पारंपरिक रस्मों का सिलसिला शुरू हुआ।