जोधपुर की एनडीपीएस कोर्ट ने 13 साल पुराने मादक पदार्थ तस्करी के मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया है। विशिष्ट न्यायाधीश (एनडीपीएस केसेज) संख्या-1, जोधपुर महानगर मधुसूदन मिश्रा की कोर्ट ने आरोपी राजेश जोशी को 2 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों के अपराधों में अनुचित सहानुभूति समाज के लिए घातक है। हालांकि, सबूतों के अभाव में सह-आरोपी सुनील उर्फ विक्रम सिंह को बरी कर दिया गया। पुलिस को देखकर भागा था तस्कर मामला 30 अक्टूबर 2013 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस स्टेशन नागौरी गेट के तत्कालीन एसएचओ नितिन दवे अपनी टीम के साथ शंभू भवन के पास नाकाबंदी कर रहे थे। शाम करीब 6:25 बजे पुलिस को देखकर राजेश जोशी ने भागने की कोशिश की। संदेह होने पर पुलिस ने उसे रोका और तलाशी ली। तलाशी के दौरान आरोपी की जीन्स की बाईं जेब से एक पारदर्शी थैली में 17.2 ग्राम स्मैक बरामद हुई। दूसरी जेब से एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा भी मिला। इस पर पुलिस ने आरोपी जालोरियों का बास मेहताजी का नोहरा निवासी राजेश जोशी पुत्र थानमल को गिरफ्तार कर लिया। बचाव पक्ष: स्वतंत्र गवाह नहीं, पुलिस ने फंसाया आरोपी राजेश के वकील ने तर्क दिया कि बरामदगी के समय पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया। वकील ने दलील दी कि एनडीपीएस एक्ट में तलाशी के नियम और धारा 42 का पालन नहीं किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि बरामदगी के बाद नमूने को 72 घंटे के भीतर एफएसएल नहीं भेजा गया, जिससे जांच प्रक्रिया संदिग्ध है। कोर्ट का विश्लेषण: ‘चांस रिकवरी’ में नियम अलग कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कानूनी स्थिति स्पष्ट की। कोर्ट ने फैसले में कहा कि यह मामला ‘चांस रिकवरी’ का है, क्योंकि पुलिस के पास पहले से सूचना नहीं थी। आरोपी नाकाबंदी देखकर भागा था और सामान्य तलाशी में ड्रग्स मिले। कोर्ट ने ‘सुनील कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश’ और अन्य सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में एक्ट की धारा 42 और 50 की सख्त पालना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि केवल पुलिस गवाह होने से ही साक्ष्य को झूठा नहीं माना जा सकता। दया याचिका पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी दोषसिद्ध होने के बाद आरोपी के वकील ने पहली बार अपराध होने और परिवार की जिम्मेदारी का हवाला देकर कम सजा की मांग की। इसके विपरीत, विशिष्ट लोक अभियोजक गोविन्दलाल जोशी ने तर्क दिया कि नशा समाज को खोखला कर रहा है, इसलिए कठोर सजा दी जाए। इस पर कोर्ट ने फैसले में लिखा- “आरोपी के प्रति नरमी का रुख अपनाने से समाज में गलत संदेश जाएगा। अनुचित सहानुभूति न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है और जनता का कानून पर से विश्वास कम करती है।” सप्लाई करने वाला बरी पुलिस ने इस मामले में मूलतया पीपाड़ सिटी के रामड़ावास हाल महामंदिर तिलग नगर द्वितीय निवासी सुनील उर्फ विक्रमसिंह पुत्र बाबूलाल को भी आरोपी बनाया था। उस पर राजेश जोशी को स्मैक सप्लाई करने का आरोप था। लेकिन कोर्ट ने पाया कि पुलिस यह साबित करने के लिए कोई कॉल डिटेल या ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी कि सुनील ने ही ड्रग्स बेचे थे। इस आधार पर कोर्ट ने सुनील को दोषमुक्त कर दिया।