माघ शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी के दिन रात में 2 बजकर 29 मिनट से होगी और इसका समापन 23 जनवरी की रात में 1 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इसी दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाएगी। जनवरी महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस महीने का मुख्य आकर्षण मकर संक्रांति 14 जनवरी को है, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन गंगा स्नान और खिचड़ी दान का विशेष महत्व है। इसके अलावा 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पड़ेगी, जिसे माघ महीने की सबसे पवित्र अमावस्या माना जाता है। इस दिन मौन व्रत रखने से आत्मिक शुद्धि होती है। महीने के अंत में 23 जनवरी को बसंत पंचमी का पर्व आएगा, जो विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना और नई शुरुआत के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इसके अलावा कृष्ण पक्ष में षटतिला एकादशी और शुक्ल पक्ष में जया एकादशी पड़ने वाली है। सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त: मॉडल टाउन के पंडित राम अवतार के मुताबिक बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने के लिए सुबह 9 बजकर 53 मिनट से लेकर 11 बजकर 13 मिनट तक का समय सबसे उत्तम रहेगा। लाभ चौघड़िया 8 बजकर 33 मिनट से लेकर 9 बजकर 53 मिनट तक। अमृत चौघड़िया 9 बजकर 53 मिनट से लेकर 11 बजकर 53 मिनट तक होगा। बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व: पंडित राम अवतार के मुताबिक इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। विद्यार्थी इस दिन विद्या, बुद्धि और सफलता की कामना करते हैं। कई स्थानों पर बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी बसंत पंचमी के दिन कराया जाता है। पीले रंग का विशेष महत्व: बसंत पंचमी को पीले रंग का पर्व भी कहा जाता है। पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है। लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं और केसरिया चावल, पीली खीर, बूंदी और हलवा जैसे व्यंजन बनाते हैं। खेतों में सरसों की पीली फसल लहलहाती दिखाई देती हैजो किसानों के लिए खुशहाली का संकेत होती है। पंडित गोल्डी शर्मा के अनुसार 23 जनवरी के दिन यानी बसंत पंचमी पर चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होने जा रहा है। वहीं, चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग बन रहा है। ज्ञान के कारक गुरु की राशि में बैठकर चंद्रमा का गजकेसरी योग बनाना अत्यंत शुभ है। इस दिन पंडितों को दान दक्षिणा देने और पूजा अर्चना करने पर विशेष लाभ मिलेगा। बसंत पंचमी और भारतीय संस्कृति: बसंत पंचमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। इस दिन से कई सांस्कृतिक गतिविधियों की शुरुआत होती है। संगीत, नृत्य और कला से जुड़े लोग इसे विशेष रूप से मनाते हैं।

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