नमस्कार टिकट वितरण में अब नेताजी की उम्र देखी जाएगी। राजनीति में ये अफवाह फैली तो नेतागण सतर्क रहने लगे। इधर केंद्रीय मंत्री ने बर्थडे पर सांसद महोदय की उम्र पूछी है। संविधान बचाने वाली रैली में पूर्व विधायक ने ‘गंगाजल’ वाली सौगंध में ही घपला कर दिया। आजकल राजनीति में ट्रेंड कर रही है बकरी। हर तरफ इसी के जलवे हैं। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी सुनिए… 1. सांसदजी के जन्मदिन पर आया गृहमंत्रीजी का फोन जालोर-सिरोही के सांसद महोदय की सेंट्रल में बड़ी वकत है। उनके जन्मदिन पर केंद्रीय गृहमंत्री ने फोन मिलाया। जन्मदिन की बधाई दी। सांसद महोदय तो खुशी में दोहरे ही हो गए। ये वही माननीय हैं, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्व सीएम के बेटे को चारों खाने चित्त कर दिया। यही वजह है कि केंद्र में उन्हें बड़े नेता बहुत मानते हैं। बातों-बातों में केंद्रीय मंत्रीजी ने सांसद महोदय से उम्र पूछ ली। सांसदजी ने विनम्रता से कहा- साहब 61 का हो गया हूं। बातें आशीर्वाद और फिर से शुभकामना जैसे शब्दों को अपने में समेटते हुए पूरी हुईं। सांसदजी ने अपने साथी से केंद्रीय मंत्रीजी से बात करते हुए वीडियो शूट कराया। इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। एक भाई ने चुटकी ले ली। कह दिया- केंद्रीय मंत्रीजी उम्र पूछ रहे हैं, ताकि अगली बार टिकट बांटते वक्त उन्हें तकलीफ न हो। अब सांसद जी इसका क्या ही जवाब दें। जयकारा लगा दिया। 2. पूर्व विधायक ने कौन सा ‘गंगाजल’ उठाकर सौगंध खाई दौसा के एक पूर्व विधायकजी का विवादों से नाता रहा है। ये वहीं हैं जिनके भाई को डमी कैंडिडेट के साथ एक एग्जाम सेंटर के बाहर से दबोचा गया था। पीड़ित की पहचान उजागर करने के मामले में भी लपेटे गए थे। केस दर्ज हो गए थे। वन विभाग के एक कर्मचारी को धमकाने का वीडियो तो खूब चला था। इनके ठिकानों पर ईडी की रेड तक पड़ चुकी है। ताजा किस्सा संविधान बचाओ रैली का है। संविधान बचाने की इस कवायद में नेताजी खुद को बचाने लगे। सामने हुजूम देखा तो पुराने दिन याद आ गए। मंच पर खड़े होकर दहाड़ कर बोले- मुझ पर और पीसीसी चीफ महोदय पर जो रेड पड़ी थी, उसमें अगर आरोप साबित हो जाएं…तो गंगाजल हाथ में लेकर कहता हूं…राजनीति की बात नहीं करूंगा। दावा तो अपनी जगह लेकिन गंगाजल का जिक्र करते हुए डायस पर रखी 10 रुपए की पानी की बोतल उठा ली। जनता समझती है- इनका तो गंगाजल भी गंगाजल नहीं। 3. राजनीति में बकरी के उपयोग का महत्व बकरी पर निबंध लिखना हो तो राजस्थान की राजनीति को समझना पड़ेगा। यहां आजकल बकरी ट्रेंड में है। बकरी गरीब की गाय होती है। कुछ लोग गाय पर राजनीति करते हैं। विपक्ष ‘गरीब की गाय’ पर राजनीति का पैंतरा आजमा रहा है। एक पूर्व मंत्रीजी जयपुर में बकरी के साथ पहुंचे थे। पत्रकार ने बकरी लाने को लेकर सवाल किया तो बोले- हम तो मरे हुए गधे पर आंदोलन कर चुके हैं। बकरी तो जिंदा है। इसके बाद फायरब्रांड बनने की कोशिश में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे एक नेताजी ने विरोध के मंच पर बकरियों का रेवड़ चढ़ा दिया। बकरियों के सामने अपने ही समर्थकों पर लात-घूंसे जमा दिए। बकरियां सहम गई। बकरियों की अम्मा खैर मनाने लगी। एक डरी हुई बकरी मंच से कूदकर पुलिस वालों के पैरों जा घुसी। दोनों नेताओं का दावा था कि पीड़ित परिवारों को सरकार ने बकरी दे दी। बकरी पर ऐतराज। इधर, दौसा में संविधान बचाने के लिए सभा कर रहे पीसीसी चीफ ने बकरी पर अलग ही बयान दे दिया। बोले-सरकार तो बकरी भी नहीं दे सकती। हमने ही प्रयास किए। बकरी कुछ कह पाती तो यही कहती- हमें तो बख्श ही दो साहब, राजनीति में न घसीटो। 4. चलते-चलते… जेल क्यों होती है। ताकि अपराधी को अपने गुनाहों का प्रायश्चित करने का समय मिले। वह अपनी बुराइयों को भूलकर अच्छा इंसान बनने की कोशिश करे। वह समाज की मुख्यधारा में शामिल होने लायक आदमी बने। वह अपने अंतर्मन को बदल सके। वह नेकी पर चले और बदी से डरे। गलत। जयपुर में जेल का मतलब है बदमाश पूरी आजादी महसूस करें। सिर्फ महसूस न करे। बल्कि अपनी आजादी के वीडियो बनाए। एक-दो नहीं, 8 बदमाश मिलकर वीडियो बनाएं। बसे-बसाए पूरे शहर में आग लगाने की धमकियां दें। बाबाजी का जयकारा लगाएं और बाकायदा रैंप वॉक करते हुए शूटिंग कराएं। जेल का मतलब है बदमाश के पास मोबाइल भी जरूर हो। वरना वह अपना नेटवर्क कैसे चलाएगा? फिरौती कैसे मांगेगा? जयपुर की जेल में ये सारी सुविधाएं बदमाशों को मुहैया हैं। अब इस पर और क्या ही कहें। बदमाशों की बात करते-करते बात कहीं से कहीं पहुंच जाएगी। रहने देते हैं। जय-जय राजस्थान। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…