मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी की कुलगुरु प्रोफेसर सुनीता मिश्रा ने अपने विवादित बयान को लेकर महाराणा प्रताप के वंशज और नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ को लिखित माफीनाम भेजा है। इधर, माफीनामे मिलने के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए विधायक मेवाड़ ने लोगों से पूछा है कि इतिहास पर हो रहे इस प्रकार के बयानों को कब तक माफ किया जाए? बता दें, प्रोफेसर सुनीता मिश्रा ने माफीनामे में लिखा है कि हाल ही मैंने एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बयान दिया था। इससे राजस्थान, मेवाड़ और विशेषकर राजपूत समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, उनसे मैं माफी मांगती हूं। मेरे बयान से महाराणा प्रताप के वंशज महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ आहत हुए हैं। वीरों की इस धरती पर किसी को अपमानित करने का मेरी कोई मंशा नहीं थी। बता दें, एक दिन पूर्व भी कुलगुरु ने एक वीडियो जारी करते हुए अपने बयान को लेकर माफी मांगी थी। जानिए, कुलगुरु सुनीता मिश्रा ने क्या कहा था 12 सितंबर को यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में प्रो. सुनीता मिश्रा ने कहा- ऐतिहासिक दृष्टिकोण से हम महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और अकबर जैसे कई राजा-महाराजाओं के बारे में सुनते हैं। इनमें कुछ औरंगजेब जैसे कुशल प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) भी थे। पहले कुलगुरु बोली थीं- बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया विवाद बढ़ने के बाद कुलगुरु प्रो. सुनीता मिश्रा ने माफी मांगते हुए एक बयान जारी किया था। उन्होंने कहा- वक्तव्य को गलत तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। यदि उनके पूरे वक्तव्य को सुना जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उन्होंने औरंगजेब की प्रशंसा में कुछ नहीं कहा है। वे मूलतः अहिन्दी भाषी हैं, जिसके कारण सुनने में भाषा संबंधी असमंजस हो जाता है। उनका मंतव्य किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था और यदि उनके वक्तव्य से किसी को ठेस पहुंची हो तो वे क्षमा चाहती हैं।