पिछले दिनों पीएम किसान सम्मान निधि जैसी सामाजिक कल्याण की कई योजनाओं में सेंध लगाकर करोडों रुपए फर्जी खातों में भेजने के मामले में कई ई- मित्र संचालकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जिसके बाद डीओआईटी ने 14 ई- मित्र संचालकों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया। भास्कर ने मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि पिछले 5 साल में 250 से ज्यादा ई मित्र संचालक फर्जी डिग्री, सरकारी सिस्टम में सेंध लगाकर करोडों के घोटाले में भी पकड़ में आ चुके हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में 70 हजार से ज्यादा ई मित्र चल रहे हैं। इन पर आमजन को 600 तरह की सर्विस उपलब्ध कराई जाती है। महीने में करीब 400 करोड रुपए का ट्रांजेक्शन होता है। 2024 में 342.98 लाख, अक्टूबर 2025 तक 221 लाख पेनल्टी सरकारी योजनाओं में धांधली, फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट व डिग्रियां तक मिली केस 1 – अक्टूबर में झालावाड़ में साइबर पुलिस ने सामाजिक कल्याण की योजनाओं में धांधली करने वाले आरोपियों को पकड़ा था। जांच के बाद 14 ई मित्र कियोस्क को स्थायी बंद कर दिया। केस 2 – सामाजिक सुरक्षा पेंशन और मुफ्त स्कूटी वितरण योजना में लाभ दिलाने के उद्देश्य से प्रदेश में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट जारी किये गए। इस मामले में 4 ई मित्र संचालकों की भूमिका मिली। इन्हंें ब्लैकलिस्ट किया। केस 3 – मनोहरथाना में फर्जी पेंशन आवेदन मिले। जांच में सामने आया कि 5 ई मित्र संचालकों ने जारी किये हैं। उन पर कार्रवाई की गई। केस 4 – जयपुर में 3 ई मित्रों पर पुलिस ने छापा मारा था। जहां 13 प्राइवेट यूनिवर्सिटी की करीब 700 फर्जी डिग्रीयां मिली। संचालकों द्वारा विभिन्न भर्तियों के लिए इन्हें बेचा जा रहा था। केस 5 – जालोर, बाड़मेर सहित कई जिलों में ई मित्रों पर फर्जी आधार कार्ड बनाने के मामले सामने आए थे। जहां पैर के अंगूठे से भी आधार कार्ड बनाए गए थे। इसके बाद केंद्रीय एजेंसियां भी जांच के लिए आई थी।

ई-मित्र केंद्रों पर आमजन को सर्विस देने के अलावा अन्य गैर कानूनी कार्य नहीं हो सकते। ऐसी शिकायतें मिलने के बाद जांच में दोषी मिलने पर संचालक की आईडी ब्लैकलिस्ट करने और पेनल्टी लगाने की कार्रवाई की गई है। -हिमांशु गुप्ता, आयुक्त व विशेष सचिव, डीओआईटी