भास्कर न्यूज | अमृतसर चंडिका मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ शुक्रवार को सम्पन्न हो गई। कथा दौरान हिमाचल बिलासपुर से पधारे आचार्य सुमित शास्त्री ने श्रीकृष्ण-सुदामा की अद्वितीय मित्रता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह मित्रता संसार को सिखाती है कि हृदय का प्रेम ही संबंधों का वास्तविक आधार है। जिसमें न धन की आवश्यकता, न पद की। सिर्फ सच्चे भाव की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा आया कि श्रीकृष्ण द्वारका के राजा बन गए। वहीं दूसरी तरफ उनके मित्र सुदामा इतने गरीब हो चुके थे कि घर में रोज का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया था। सुदामा अपनी पत्नी और बच्चों का पालन-पोषण भी नहीं कर पा रहे थे। मित्रता का रिश्ता इस दुनिया में सबसे सुंदर माना जाता है, क्योंकि इस रिश्ते में न कोई रंग देखा जाता है, न रूप, न पैसा और न ही कोई भेदभाव। वैसे भी जब कोई सच्ची दोस्ती की मिसाल देता है तो सबसे पहले दिमाग में श्रीकृष्ण और उनके मित्र सुदामा का नाम आता है। शास्त्री जी ने कहा कि श्रीकृष्ण सिर्फ एक राजा या भगवान नहीं थे, वो प्रेम के प्रतीक, करुणा के सागर और रिश्तों को निभाने वाले सच्चे इंसान थे। सुदामा अपने परिवार को रोजाना मित्र श्री कृष्ण के बारे में बताते थे। एक दिन सुदामा की पत्नी सुशीला बोली ‘आप श्रीकृष्ण के बचपन के मित्र हैं’ आज वो द्वारका के राजा हैं। आप उनसे मदद क्यू नहीं मांगते हैं। सुदामा को यह बात सुनकर थोड़ी झिझक हुई, लेकिन उनके पास कोई और रास्ता नहीं बचा था। इसलिए उन्होंने सोचा कि वो कृष्ण से मिलने द्वारका जाएंगे। सुदामा का नाम सुनते ही भगवान श्री कृष्ण द्वार तक नंगे पैर भागे चले आए और मित्र सुदामा को गले से लगा लिया। इस मौके पर पंडित अमित, पंडित दीपक, राकेश भोपाल, साहनी भोपाल, पूजा, शिवानी समेत कई भक्त मौजूद रहे।
