टिब्बी में किसानों और पुलिस के बीच हुई झड़प के मामले में माकपा नेता मंगेज चौधरी ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की विफलता के कारण यह मामला इतना बढ़ गया। इस झड़प में मंगेज चौधरी का पैर फ्रैक्चर हो गया। पहले पुलिस पर लाठी चलाने के आरोप चौधरी ने बताया- बुधवार को प्रदर्शन के दौरान पहली लाठी पुलिस द्वारा चलाई गई थी, जिसके बाद किसानों ने केवल अपना बचाव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे दिन प्रदर्शन के दौरान अधिकारी बंद कमरों में बैठे रहे और किसी ने भी किसानों से बातचीत करना उचित नहीं समझा। प्रशासन पर बातचीत न करने का आरोप मंगेज चौधरी ने बताया कि उन्होंने खुद दोपहर 3 बजे तक प्रशासन से बातचीत का आग्रह किया था, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई निमंत्रण नहीं आया। इसके बाद किसान आक्रोशित हो गए। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन लाठी-गोली के दम पर इस आंदोलन को कुचलना चाहता है। प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया चौधरी ने कहा- लंबे समय से आंदोलनरत किसानों को आज तक जिला प्रशासन संतुष्ट नहीं कर पाया है। उन्होंने पूरे मामले में प्रशासन के रवैये को तानाशाही बताया और कहा कि प्रशासन बंदूक की नोक पर एथेनॉल फैक्ट्री का संचालन करना चाहता है, लेकिन ऐसा किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा। पुलिस की मारपीट से पैर फ्रैक्चर होने की बात कही उन्होंने बताया कि किसान शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया, जिसमें उनका पैर भी फ्रैक्चर हो गया। चौधरी ने यह भी बताया कि पुलिस लाठीचार्ज से कई अन्य किसान भी घायल हुए हैं। उनके अनुसार, पूर्व में भी फैक्ट्री के विरोध में चल रहे धरने को प्रशासन ने बलपूर्वक हटाया था, जिससे किसानों में रोष था। मंगेज चौधरी ने कहा कि वे अंतिम सांस तक किसानों के साथ हैं और हर कदम पर किसानों को साथ लेकर लड़ेंगे। उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार पर पूंजीपतियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। चौधरी ने कहा कि यह समझ से परे है कि किसानों के इतने विरोध के बावजूद भी सरकार और पूरा प्रशासन फैक्ट्री लगाने पर तुला हुआ है।
