जयपुर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना-2025 में शामिल बुजुर्गों ने हंगामा कर दिया। इन बुजुर्गों को वातानुकूलित (AC) ट्रेन राजस्थान वाहिनी भारत गौरव से गंगासागर (पश्चिम बंगाल) की तीर्थ यात्रा के लिए जाना था। चयनित एक हजार यात्रियों को भेजा जाना था, लेकिन उससे ज्यादा यात्री आ गए। करीब 120 बुजुर्गों को वापस घर जाने को कह दिया। यह ट्रेन मंगलवार रात रवाना हो गई। जयपुर, उदयपुर और अजमेर संभाग से तीर्थ यात्री जयपुर जंक्शन पर आए थे। देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त महेंद्र देवतवाल ने बताया- जो आज यात्रा से वंचित रह गए, उन्हें आगे प्राथमिकता से इस श्रेणी में यात्रा करवाई जाएगी। जयपुर रेलवे स्टेशन पर 120 तीर्थ यात्री ज्यादा आ गए थे। उन्हें 18 दिसंबर को तीर्थ यात्रा के लिए भेजा जाएगा। तय संख्या से ज्यादा बुजुर्गों को किया था फोन
देवस्थान विभाग की ओर से इस तीर्थ यात्रा के लिए उदयपुर संभाग से 350, अजमेर संभाग से 350 और जयपुर संभाग से 270 बुजुर्गों को ले जाना था। उनके साथ सरकारी अधिकारी भी भेजे गए। एक कोच में दो अफसर होते हैं। देवस्थान विभाग के अधिकारियों ने बताया- जयपुर संभाग से 270 बुजुर्गों को भेजना था। ऐसे में हर बार तय संख्या से ज्यादा लोगों को फोन करते हैं। इनमें से कुछ लोग किन्हीं कारण से यात्रा के लिए नहीं पहुंच पाते। इस बार 350 के आसपास लोगों को फोन किया। इनमें से ज्यादातर तीर्थ यात्री रेलवे स्टेशन पहुंच गए। इससे स्थिति असमंजस की हो गई। टिकट नहीं मिलने पर बाकी यात्रियों ने किया हंगामा
जयपुर स्टेशन पर शाम 5 बजे जिन बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा के तहत जाने का टिकट नहीं मिला। उनके परिजनों ने स्टेशन के बाहर वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना के लिए बनाए टेंट में हंगामा कर दिया। इन बुजुर्गों के परिजनों और मौके पर मौजूद अधिकारियों में हाथापाई तक की नौबत आ गई। तीर्थ यात्री बोले- हमें नहीं ले जाना था तो क्यों बुलाया
तीर्थ यात्रा में चयनित बुजुर्ग महिला ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- तीर्थ यात्रा नहीं करवाई तो पटरी पर जाकर सो जाऊंगी। जब हमें नहीं ले जाना था तो क्यों बुलाया गया? लोगों ने राजस्थान सरकार से मांग की कि अगर हमें ट्रेन से नहीं भेजा जा सकता तो सरकार हमें बस से तीर्थ यात्रा पर भेजे। चाहे तो सरकार आधा किराया ले ले। एक बुजुर्ग यात्री ने आराेप लगाया- अधिकारियों ने हमारे फॉर्म तक फाड़ दिए। हमें दो बार फोन कर सूचना दी गई थी। इसके बाद हम जयपुर रेलवे स्टेशन में इस टेंट में तीर्थ यात्रा के लिए आए हैं। यात्री बोले- सुबह से बैठे हैं, चाय-पानी भी नहीं दिया
बुजुर्ग बोले- हमारे साथ नाइंसाफी हुई है। हमें बुलाकर भी तीर्थ यात्रा नहीं करवाई जा रही। लोगों ने कहा- सुबह से बैठे हैं। हमें चाय-पानी भी नहीं दिया गया। खेतड़ी (झुंझुनूं) निवासी प्रवीण कुमावत ने बताया- मेरी मां भगवती देवी (62) और पिता राधेश्याम कुमावत (72) को दो बार फोन आया था। इसके बाद तीर्थयात्रा के लिए जयपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे। अब सूचना दी कि ज्यादा यात्री आने से टिकट नहीं दे सकते। टिकट देने वाले यात्रियों को ही दिया खाना, बाकी रहे भूखे
यहां सिर्फ उन लोगों को ही भोजन दिया गया, जिन्हें तीर्थ यात्रा के लिए टिकट दिया गया। यात्रियों ने बताया- अलग-अलग जिलों से आए लोगों को भूखे-प्यासे घर लौटना पड़ा। लोगों ने कहा- अफसरों की लापरवाही से इतने दूर-दूर से तीर्थ यात्रा के लिए आए लोगों को मायूस लौटना पड़ा।
