लुधियाना में लाडोवाल टोल प्लाजा के पास कार हादसे में मारे गए 3 युवकों के परिवार की दर्दनाक कहानी सामने आई है। तीनों बचपन के दोस्त थे और उन्होंने दुनिया भी साथ में ही छोड़ी। एक युवक की मां-बहन की हादसे में मौत हो गई थी तो पिता ने उसकी परवरिश के लिए दूसरी शादी तक नहीं की। दूसरे मृतक की कमाई से ही घर का खर्चा चल रहा था। तीसरा मृतक परिवार को अच्छी जिंदगी देने के लिए वह विदेश जाने की तैयारी कर रहा था। हादसे में मरी 2 लड़कियां भी परिवार के लिए सैलून में नौकरी कर रहीं थीं। पुलिस ने पांचों मृतकों के शव मॉर्च्युरी में रखवाए हैं। आज मंगलवार को उनका पोस्टमॉर्टम करवाकर शव वारिसों काे सौंपे जाएंगे। उसके बाद गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा। हालांकि अभी तक ये सामने नहीं आया कि हादसा ओवरस्पीड की वजह से हुआ या किसी दूसरे कारण से। पुलिस भी जांच की बात कह रही है। वीरू के पिता बोले- पत्नी मरी तो दूसरी शादी नहीं की वीरू के पिता मुकंद सिंह ने बताया कि वीरू पढ़ने में होशियार था। करीब पांच साल पहले उनका एक्सीडेंट हुआ तो वीरू ने पढ़ाई छोड़कर काम करना शुरू किया ताकि घर का खर्च चल सके। उन्होंने बताया कि वीरू उसके बाद काम करने लगा। वह टेलर के साथ काम करता था। सड़क हादसे में जब उनकी पत्नी व बेटी की मौत हुई तो रिश्तेदारों व अन्य लोगों ने उसे कहा कि दूसरी शादी कर ले। बच्चा पल जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके मन में डर था कि दूसरी शादी की तो बच्चे की सौतेली मां होगी। हो सकता है सौतेली मां उसे प्यार न करे। इसीलिए उन्होंने अकेले बच्चे को खुद ही पालने का फैसला किया। लुधियाना में हुए भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों व दो युवतियों की मौत हो गई। इस हादसे का एक और दर्दनाक पहलू है। हादसे में जान गंवाने वाले वीरू की मां और बहन ने भी आज से करीब 17 साल पहले सड़क हादसे में ही अपनी जान गंवाई थी। वीरू के पिता मुकंद सिंह अब इस दुनिया में बिल्कुल अकेले रह गए हैं। वीरू की उम्र जब 5 साल थी तो फिरोजपुर में उसकी मां ऊषा रानी व 3 साल की बहन खुशी की मौत एक सड़क हादसे में हो गई थी। वीरू के पिता मुकंद सिंह पत्नी व बेटी की मौत से बेहद टूट चुके थे लेकिन पांच साल के बेटे को पालने के लिए उन्होंने संघर्ष शुरू किया। खुद ड्राइविंग करते हुए सीमित साधनों के बीच अपने बेटे का पालन पोषण किया और अब वह भी सड़क हादसे में जान खोकर उन्हें अकेला छोड़कर चला गया। मुकंद सिंह का कहना है कि उनकी दुनिया ही उजड़ गई। अब वो किसके लिए जिएंगे। सुक्खा डीजे वाले के साथ काम करके करता था गुजारा
दूसरे मृतक सुक्खा सतपाल के पिता तरसेम सिंह ने बताया कि वो हलवाई का काम करते हैं। सीजन में काम मिलता है तो उसी से घर का गुजारा चलता था। सुक्खा बड़ा बेटा था तो उसने भी घर की आर्थिक स्थिति को देखकर दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और काम करने लगा। वह डीजे वालों के साथ काम करता था। उसके पैसों से ही घर चल रहा था। सतपाल उर्फ सुक्खा के कमरे में उसके कपड़े, उसका डी.जे. वाला बैग और मोबाइल कवर अभी भी वैसे ही रखा था। उसकी बीमार मां लगातार बेहोश हो रही थीं और बार-बार रोते हुए यही कह रही है कि मेरे सत्ते पुत, इक बारी बोल दे… मैं उठ जावां, नईं तां मैनूं वी अपने नाल लै जा। सिमरन ने जाना था हायर स्टडी के लिए न्यूजीलैंड
तीसरे मृतक सिमरन के पिता भारतीय सेना से रिटायर्ड कैप्टन हैं। उसने भी 12 वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। अब वो हायर स्टडी के लिए न्यूजीलैंड जाने की तैयारी कर रहा था। उसका बड़ा भाई पहले से ही न्यूजीलैंड में रहता है। पिता का कहना है कि बेटा घर से बूट व कपड़े खरीदने की बात कहकर गाड़ी लेकर निकला था। परिजनों का कहना है कि सिमरन का सपना विदेश जाने का था। इसलिए वो काफी समय से तैयारी कर रहा था। वहीं उसकी मां उसे विदेश भेजने से पहले उसकी शादी करवाना चाहती थी। इसलिए परिवार उसके लिए लड़की भी देख रहा था। सिमरन की मां हरजीत कौर रोते-रोते बार-बार यही कह रही है कि तू केहंदा सी मैं तैनूं विदेश लै के जावांगा… हुन आप कित्थे चला गया, मैनू छड्ड के?” मां कह रही है मैं तेरे लिए लड़की देख रही थी ताकि तेरी शादी हो जाए और तू पहले ही चला गया। तीनों बचपन के दोस्त, दुनिया भी एक साथ छोड़ी वीरू के पिता मुकंद सिंह ने यह भी बताया कि उसका बेटा वीरू, सुक्खा व सिमरन तीनों बचपन से दोस्त थे। तीनों गांव की गलियों में साथ खेले। उनका कहना है कि सिमरन संपन्न परिवार का बच्चा था इसके बावजूद उसकी वीरू व सुक्खा के साथ पक्की दोस्ती थी। वीरू और सुक्खा अपनी ड्यूटी खत्म करके आते थे तो एक बार तीनों आपस में जरूर मिलते थे। मुकंद सिंह का कहना है कि इन तीनों की दोस्ती की मिसाल पूरे गांव में दी जाती है। गांव के सरपंच हरप्रीत सिंह ने बताया कि तीनों बच्चे साथ ही बड़े हुए हैं और साथ ही खेलते रहे हैं। यही नहीं गांव में सभी के साथ उनका व्यवहार अच्छा था। जानिए, कैसे हुआ हादसा… 30 मीटर तक क्रश बैरियर के साथ घसीटते हुए आई कार
रविवार रात लाडोवाल टोल प्लाजा के पास लाडोवाल बाईपास के फ्लाईओवर पर बने कर्व में आते ही उनकी कार बैरियर से टकराई। जहां कार पहले टकराई वहां पर सीमेंट की रेलिंग है। कुछ दूरी के बाद लोहे की रेलिंग लगी है। लोहे की रेलिंग पर भी कार के घसीटने की वजह से खरोच आई हुई है। जहां कार क्रश बैरियर से पहली बार टकराई, वहां से करीब 30 मीटर तक कार के घसीटने के निशान हैं। 30 मीटर बाद रेलिंग पर खून के निशान हैं। लोहे की रेलिंग पर सिर्फ खरोंच आई है। रेलिंग कहीं से न तो मुड़ी है और न ही पिचकी है। जिससे हादसे को लेकर परिजनों के मन में संशय है। मृतकों के परिजन बोले- ये हादसा नहीं
मृतक सुक्खा सतपाल जिसके साथ डीजे का काम करता था, उसके मालिक सिमरन सिंह हैं। उनका कहना है कि कार जितनी डैमेज हुई है, उसके हिसाब से शव बाहर गिरने का सवाल ही नहीं उठता। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक्सीडेंट नहीं हो सकता है। वीरू के पिता मुकंद सिंह का कहना है कि वो भी ड्राइवर हैं और रोजाना सड़क पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि कई हादसे देख लिए हैं लेकिन ऐसा पहली बार देखा है। उनका कहना है कि यह एक्सीडेंट हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। अगर लेफ्ट साइड क्रश बैरियर से टकरा गई थी तो ड्राइविंग साइड वाले सेफ रहने चाहिए थे। इसकी सही ढंग से जांच होनी चाहिए।