मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) में 12वें दीक्षांत समारोह का भव्य आगाज हुआ। दो दिवसीय कार्यक्रम में कुल 3,508 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जा रही हैं। समारोह की शुरुआत अकादमिक प्रोसेशन और मणिपाल कुलगीत के साथ हुई। परिसर में स्नातकों के साथ उनके परिजन, संकाय सदस्य तथा शिक्षा और उद्योग जगत के कई प्रमुख लोग शामिल हुए। पहले दिन मुख्य अतिथि के रूप में सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी मौजूद रहीं। उन्होंने एमयूजे के विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षण वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि मात्र 14 वर्षों में एनआईआरएफ रैंकिंग में 58वां स्थान हासिल करना विश्वविद्यालय की क्षमता और समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि आने वाले 20–30 वर्षों में एमयूजे से दो–तीन नोबेल पुरस्कार विजेता निकलना संभव है। इस वर्ष कुल 3,007 स्नातक, 377 स्नातकोत्तर और 124 डॉक्टोरल उपाधियां दी जा रही हैं। साथ ही 48 स्वर्ण पदक प्रदान किए जा रहे हैं। चार संकायों-स्वास्थ्य विज्ञान, विधि, प्रबंधन-वाणिज्य-कला तथा विज्ञान-प्रौद्योगिकी-वास्तुकला-के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में डॉ. कलैसेल्वी ने स्नातकों से देश के विकास में योगदान देने, नवाचार को आगे बढ़ाने और शिक्षा से प्राप्त मूल्यों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में भागीदारी निभाने का आह्वान किया। समारोह में प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. करुणाकर ए. कोटेगर ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि प्रेसिडेंट डॉ. नीति निपुण शर्मा ने विश्वविद्यालय की पिछले 14 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अभिभावकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि एमयूजे भविष्य उन्मुख कोर्स, इंटरडिसिप्लिनरी मॉडल और इनोवेशन रिसर्च के क्षेत्र में और मजबूती से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ. दासारी नागराजु ने स्नातकों को शपथ दिलाई। कुलसचिव डॉ. अमित सोनी ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। राष्ट्रगान के साथ पहले दिन का समापन हुआ। दीक्षांत समारोह का दूसरा दिन 16 नवंबर को आयोजित होगा, जिसमें टाटा एआईए के एमडी एवं सीईओ वेंकटाचलम अय्यर मुख्य अतिथि रहेंगे।
