झुंझुनूं में भ्रूण लिंग की जांच करने के मामले में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पूछताछ में बताया- 2003 से ये काम कर रहा हूं। 1 करोड़ कमा लेता हूं और 50 लाख जमानत में चला जाता है। कोई जिंदगीभर तो जेल में रहना नहीं है, आराम करने जाता हूं। फर्जी डॉक्टर 8वीं बार पकड़ा गया है। मामला खेतड़ी इलाके का है। प्री कॉन्सेप्शन प्री नेटल डायग्नोस्टिक तकनीक (PCPNDT) के झुंझुनूं जिला समन्वयक आनंदराज ने बताया- जन्म से पहले भ्रूण लिंग परीक्षण कराने वाले फर्जी डॉक्टर उत्तर प्रदेश के अयोध्या निवासी अवधेश पांडे को 9 नवंबर को पकड़ा था। PCPNDT की टीम को सूचना थी कि झुंझुनूं में हरियाणा बॉर्डर पर जन्म से पहले भ्रूण के लिंग का पता करने वाली टीम एक्टिव है। ऐसे में नारनौल PCPNDT टीम ने 5 महीने की गर्भवती महिला को डमी ग्राहक बनाकर जाल बिछाया था। पचेरी के रहने वाले एजेंट सत्येंद्र ने 50 हजार में सौदा तय किया। महिला को लेकर खेतड़ी के गांव बड़ाऊ में एक घर में ले गया था। वहां मौजूद अवधेश पांडे ने जांच कर गर्भ में लड़की होना बताया। उसने महिला से 30 हजार ले लिए। जैसे ही अवधेश को पैसे दिए, इशारा मिलते ही पुलिस और PCPNDT की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया। 1987 में आया था राजस्थान
आनंद राज ने बताया- अवधेश 1987 में खेतड़ी के एक निजी अस्पताल में बागवानी का काम करने आया था। शुरुआत में वह पौधे लगाने और परिसर की देखरेख करता था। धीरे-धीरे वह लैब और सोनोग्राफी रूम के आस-पास घूमने लगा। यहां उसने धीरे-धीरे मशीनों का संचालन और जांच प्रक्रिया को समझ लिया। खुद की लैब खोली थी
पूछताछ में आरोपी ने बताया- साल 1995 में उसने खेतड़ी में अपनी एक निजी लैब खोली। शुरू में एक महिला डॉक्टर यहां जांच करती थी। कुछ ही सालों में वह खुद सोनोग्राफी करना सीख गया और खुद को ‘डॉक्टर’ बताकर अवैध कारोबार शुरू कर दिया। साल 2000 में खेतड़ी में एक पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट खोला और युवाओं को फर्जी डिप्लोमा-सर्टिफिकेट दिलाने लगा था। 2003 के आसपास आरोपी ने भ्रूण लिंग परीक्षण करना शुरू किया और 2007 में पहली बार पकड़ा गया। नेपाल से मंगाई थी मशीन
पूछताछ में सामने आया कि अवधेश ने नेपाल से पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन मंगवाई थी, जिसे वह गाड़ी में छिपाकर घूमता था। जांच के लिए वह मशीन को किसी घर, ढाबे या सुनसान जगह पर सेट करता था। दलाल उसे कॉल पर मरीज का लोकेशन देते थे और तुरंत जांच करवाकर वापस ले जाते थे, जिससे उसका नेटवर्क गोपनीय बना रहता था। लड़का बताने के 50 हजार, लड़की के 30 हजार लेता
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी हर भ्रूण लिंग परीक्षण के बदले 50 हजार रुपए लेता था। अवधेश गलत काम में भी छूट देता था। अगर लड़का होता तो पूरे 50 हजार लेता था और लड़की होती तो उसके 20 हजार डिस्काउंट कर 30 हजार की फीस लेता था। नाम बदलकर फिर से काम शुरू कर देता
अवधेश ने जांच अधिकारियों को बताया कि हर बार पकड़े जाने के बाद वह अपना नाम बदल लेता। कभी एपी पांडे तो कभी डॉ. अवधेश कुमार के नाम से अलग-अलग जगहों पर यह अवैध काम करता था। अवधेश के सैकड़ों ऐसे दलाल है, जो अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है। उसका नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान और यूपी तक फैला हुआ है।
