गौशालाओं को अनुदान में देरी को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और गौपालन राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गौशालाओं को मिलने वाले अनुदान में देरी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने इसे गलत बताया। जूली ने गौपालन राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म पर तंज कसते हुए कहा कि जनता को बरगलाने और मुख्यमंत्री की छवि चमकाने की जगह अपनी कमियां स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि तीन महीने पहले भी राजस्थान में भाजपा की ही सरकार थी, तब भी यही स्थिति थी और आज भी कोई सुधार नहीं हुआ है। जूली ने यह भी कहा कि तीन दिन पहले ही गौशाला संचालकों ने मई-जून तक का अनुदान लंबित होने के कारण प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। अलवर जिले की 39 गौशालाओं को 9 माह से अनुदान नहीं मिला
जूली ने कहा- अलवर जिले की 39 गौशालाओं को 9 माह से अनुदान नहीं मिला है जिससे 20 हजार से अधिक गौवंश के लिए चारे पानी का संकट हो गया है। गौशाला संचालक परेशान हैं और सभी जगह गुहार लगा रहे हैं। अब तो सरकार के मंत्री तक रह रहे हैं कि सरकार की मॉनिटरिंग कमजोर है और गौपालन राज्य मंत्री और सरकार मीडिया तक की सूचनाओं और आम जनता की परेशानियों पर ध्यान नहीं दे रही है। जूली ने कहा- कांग्रेस सरकार के समय ही पहले 3 महीने के लिए गौशालाओं को अनुदान देना शुरू किया और इसे बढ़ाकर 9 माह का किया गया। वसुंधरा राजे के कार्यकाल में गौशाला अनुदान में जो खर्चा होता था उससे लगभग 6 गुना पैसा गौमाता के लिए खर्च अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने किया था। भाजपा सरकार को गौशालाओं के इस अनुदान को आगे बढ़कर 12 महीने करने की घोषणा करनी चाहिए। बेढ़म ने कहा- जूली का ट्वीट भ्रामक, गौशालाओं को 640 करोड़ का भुगतान कर दिया
गौपालन राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने पलटवार करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का पुरानी खबर को लेकर किया ट्वीट भ्रामक है। राज्य सरकार के त्वरित निर्णयों से घबराकर कांग्रेस अब बासी खबरों का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने में जुटी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने गौशालाओं को 640 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है। साथ ही पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ दिया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और हर योग्य गौशाला को प्राथमिकता के आधार पर अनुदान मिल सके।