मोरबी. सिरेमिक उद्योग में उपयोग की जाने वाली प्रोपेन गैस के भाव में दिवाली से पहले 7300 रुपए प्रति टन की वृद्धि की गई है। यहां का सिरेमिक उद्योग पिछले छह महीने से अधिक समय से गैस संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ईरान-अमरीका युद्ध के बाद बने हालात के बीच उद्योग पहले ही निर्यात में कमी, कंटेनर भाड़े में बढ़ोतरी और बाजार में कमजोर मांग से परेशान है। अब प्रोपेन गैस के भाव में बढ़ोतरी ने सिरेमिक उद्योगपतियों की चिंता और बढ़ा दी है।मोरबी सिरेमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र संघात ने बताया कि प्रोपेन गैस के भाव में प्रति टन 7,300 रुपए की वृद्धि हुई है। यानी प्रति किलो गैस की कीमत में करीब 7 रुपए का इजाफा हुआ है। प्रोपेन गैस के पहले प्रति किलो भाव 90 रुपए थे, अब बढ़कर प्रति किलो भाव 97 रुपए हो गए हैं। कच्छ जिले में कंडला व पोरबंदर से मिलने वाली प्रोपेन गैस के भाव में यह वृद्धि हुई है।संघात के अनुसार, प्राकृतिक गैस और प्रोपेन गैस की कीमतों में पहले कुछ अंतर था। प्राकृतिक गैस की तुलना में प्रोपेन गैस सस्ती पड़ती थी, इसलिए उद्योगपति इसका इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन अब प्रोपेन गैस की कीमत भी प्राकृतिक गैस के करीब पहुंच गई है। मोरबी के सिरेमिक उद्योग में प्रतिदिन लगभग 4 हजार टन प्रोपेन गैस की खपत होती है।उन्होंने बताया कि प्राकृतिक गैस की कीमत पहले प्रति किलो करीब 90 रुपए थी, जिसमें कुछ कमी आने के बाद अब यह लगभग 84 रुपए प्रति किलो के भाव में मिल रही है। मोरबी के सिरेमिक उद्योग में प्रतिदिन करीब 9 लाख क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस की खपत होती है। हालांकि, प्राकृतिक गैस की कीमत में कमी आने के बावजूद यह अभी भी प्रोपेन गैस की तुलना में महंगी है। सिरेमिक इकाइयों की कुल उत्पादन लागत में गैस की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत है।
