आमेर किले की ऐतिहासिक दीवारें, गणेश पोल की कलात्मक नक्काशी, शीशमहल की चमक और राजसी स्थापत्य की भव्यता। इसी विरासत के बीच जब रैंप पर पारंपरिक परिधान, हाथों की बारीक कारीगरी और शाही आभूषण के साथ राजस्थान की संस्कृति पेश करते हुए मॉडल्स ने फैशन के नए अंदाज में छाप छोड़ी। ऐतिहासिक आमेर किले में आयोजित ‘हैरिटेज डोर सीजन-3’ में राजस्थान की स्थापत्य कला, वस्त्र परंपरा, हस्तशिल्प और समकालीन फैशन का खूबसूरत मेल देखने को मिला। छह सीक्वेंस में फैशन शो में 150 से अधिक महिला और पुरुष मॉडल्स ने कैटवॉक किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी रहीं। राजस्थान सरकार के पर्यटन और पुरातत्व विभाग के सहयोग से आयोजित फैशन शो की खासियत यह रही कि आमेर महल के अलग-अलग हिस्सों की पहचान को परिधानों और आभूषणों की थीम से जोड़ा गया। गणेश पोल, सूरजपोल, चांदपोल, शीशमहल, जनाना महल, केसर क्यारी, सुख निवास और चार बाग जैसे ऐतिहासिक स्थलों के नाम पर सीक्वेंस तैयार किए गए। हर सीक्वेंस में डिजाइनर्स ने राजस्थान की पारंपरिक कारीगरी को अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। आयोजक शिवाली गुप्ता, सोनाली खंडेलवाल और प्रिया दीवान ने बताया- शो डायरेक्टर अभिमन्यु सिंह तोमर के निर्देशन में इस आयोजन को राजस्थान की विरासत और आधुनिक फैशन के संगम के रूप में तैयार किया गया। फैशन शो के फोटोज यहां देखिए… गणेश पोल: साड़ी, इंडो-वेस्टर्न लहंगे और ब्राइडल ज्वैलरी का संगम आमेर महल का गणेश पोल के स्थापत्य सौंदर्य से प्रेरित सीक्वेंस में डिजाइनर्स कुल प्रकाश तनेजा और प्रेमप्रकाश तनेजा के परिधान प्रस्तुत किए गए। उनके कलेक्शन में पारंपरिक साड़ियों के साथ इंडो-वेस्टर्न लहंगों और स्मार्ट कैजुअल वियर को शामिल किया गया। इस सीक्वेंस में माधुरी धूत की ब्राइडल ज्वैलरी ने परिधानों के सौंदर्य को और निखारा। ब्राइडल लुक के अनुरूप आभूषणों और पारंपरिक परिधानों की जुगलबंदी ने विवाह समारोहों के लिए शाही स्टाइल की झलक पेश की। सूरजपोल और चांदपोल: कुंदन-मीनाकारी के साथ कांजीवरम की शाही छटा आमेर महल के सूरजपोल और चांदपोल से प्रेरित सीक्वेंस में गौरव जौहरी द्वारा डिजाइन की गई कुंदन, मीनाकारी और टेंपल ज्वैलरी प्रदर्शित की गई। इन आभूषणों में पारंपरिक भारतीय शिल्प की बारीकियों और राजसी आभा को प्रमुखता दी गई। कुंदन की चमक, मीनाकारी के रंग और टेंपल ज्वैलरी की पारंपरिक बनावट ने राजस्थान की आभूषण परंपरा को रैंप पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। इस कलेक्शन के साथ जोधपुर की दस्तकारी और प्रताप संस की कांजीवरम साड़ियों का संयोजन देखने को मिला। रेशमी साड़ियों की पारंपरिक बनावट और शिल्पकारी से तैयार आभूषणों ने दक्षिण भारतीय वस्त्र परंपरा तथा राजस्थान की राजसी ज्वैलरी के बीच खूबसूरत सामंजस्य बनाया। शीशमहल: पुरुष परिधानों के साथ जेमस्टोन ज्वैलरी का मेल आमेर किले के शीशमहल से प्रेरित सीक्वेंस में फैशन डिजाइनर दिग्विजय सिंह राठौड़ का मेंसवियर कलेक्शन प्रस्तुत किया गया। पुरुषों के परिधानों में शाही अंदाज और समकालीन फैशन के मेल को सामने रखा गया। इस कलेक्शन ने पारंपरिक राजसी पहनावे को आधुनिक पुरुषों की स्टाइलिंग के साथ जोड़ने का प्रयास किया। कलेक्शन के साथ डिजाइनर्स श्वेता और सपना टाटीवाला की जेमस्टोन ज्वैलरी प्रस्तुत की गई। रंगीन रत्नों और आभूषणों की बनावट ने परिधानों के साथ आकर्षक संयोजन बनाया। जनाना महल: सोने-चांदी के धागों और पारंपरिक कढ़ाई की बारीकियां आमेर महल का जनाना महल की विरासत को केंद्र में रखकर इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर गजल मिश्रा का ‘पहरन’ कलेक्शन प्रस्तुत किया गया। इस कलेक्शन की खासियत परिधानों में सोने, चांदी और पीतल के धागों का इस्तेमाल रही। धातु के धागों से तैयार बनावट ने वस्त्रों को अलग दृश्यात्मक पहचान दी। ड्रेसेज पर जरदोजी, आरी-तारी और पारंपरिक एम्ब्रॉयडरी की कारीगरी देखने को मिली। इन शिल्प तकनीकों में बारीक हाथ के काम और सजावटी पैटर्न को प्रमुखता दी गई। पारंपरिक कढ़ाई को आधुनिक परिधानों में शामिल कर डिजाइनर ने विरासत को समकालीन रूप देने का प्रयास किया। इस सीक्वेंस में डिजाइनर्स मनीष और संदीप खूंटेटा की डायमंड, गोल्ड और पोलकी ज्वैलरी भी प्रस्तुत की गई। आभूषणों की राजसी बनावट और परिधानों पर की गई बारीक कारीगरी ने जनाना महल की भव्यता को फैशन के माध्यम से अभिव्यक्त किया। केसर क्यारी: आधुनिक महिला की स्टाइल में रॉयल परंपराओं की झलक आमेर किले की केसर क्यारी अपनी सममित बागवानी और ऐतिहासिक परिवेश के लिए जानी जाती है। इस सीक्वेंस में डिजाइनर्स आतिशा कपूर और दामिनी गुप्ता ने आधुनिक महिला की स्टाइल को राजसी परंपराओं के साथ प्रस्तुत किया। कलेक्शन में समकालीन फैशन की सहजता और पारंपरिक सौंदर्य के मेल को प्रमुखता दी गई। गौरी माहेश्वरी के कंटेम्पररी ज्वैलरी डिजाइन्स ने इस सीक्वेंस को नया अंदाज दिया। आधुनिक बनावट वाले आभूषणों को परिधानों के साथ इस तरह प्रस्तुत किया गया कि उनमें पारंपरिक प्रेरणा और आज के फैशन की पसंद दोनों दिखाई दें। इस प्रस्तुति को खास बनाने में जयपुर परफ्यूम्स की डायरेक्टर मुस्कान वाधवानी की भूमिका भी रही। उन्होंने केसर और अन्य फूलों से तैयार इत्र की खुशबू के जरिए आयोजन के अनुभव में सुगंध का आयाम जोड़ा। सुख निवास: फ्लप्पा और गोटा-पत्ती की विरासतकालीन कारीगरी आमेर महल का सुख निवास अपने विशिष्ट स्थापत्य और पारंपरिक शाही जीवनशैली से जुड़ा है। इस सीक्वेंस में कोजागिरी बाय धागा की फैशन डिजाइनर्स वैशाली गुप्ता और अर्चना डंगायच का कलेक्शन प्रस्तुत किया गया। इसमें विरासतकालीन फ्लप्पा और गोटा-पत्ती की कारीगरी को परिधानों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। गोटा-पत्ती राजस्थान की पारंपरिक सजावटी कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कपड़ों पर की जाने वाली इस कारीगरी में धातु जैसी चमक वाले गोटे और पत्तियों के आकार की आकृतियों से डिजाइन तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक तकनीक से सजे परिधानों ने राजस्थान की वस्त्र संस्कृति और हस्तकला की पहचान को रैंप पर सामने रखा। इस कलेक्शन के साथ ज्वैलरी डिजाइनर श्याम शत्रुघ्न सिन्हा के ब्राइडल क्रिएशंस प्रस्तुत किए गए। ब्राइडल ज्वैलरी की शाही बनावट और गोटा-पत्ती से सजे परिधानों के संयोजन ने पारंपरिक विवाह परिधान की भव्यता को उभारा। चार बाग: मुगल और राजपूती स्थापत्य से प्रेरित ग्रैंड फिनाले फैशन शो के ग्रैंड फिनाले में ‘चार बाग’ सीक्वेंस के जरिए मुगल और राजपूती स्थापत्य कला से प्रेरित शाही परिवेश प्रस्तुत किया गया। इस सीक्वेंस में फैशन डिजाइनर्स ऋषि और विभूति ने परिधानों पर रचनात्मक और भविष्यवादी डिजाइन दृष्टिकोण को सामने रखा। पारंपरिक स्थापत्य की प्रेरणा और आधुनिक डिजाइन सोच का मेल इस प्रस्तुति का प्रमुख पक्ष रहा। इस कलेक्शन के साथ डिजाइनर विपुल अग्रवाल और अग्रवाल एंड कंपनी ने डिजाइनर ज्वैलरी प्रस्तुत की गई। इसमें पोलकी, लैब-ग्रोन डायमंड्स और समकालीन आभूषण डिजाइन्स शामिल रहे। पारंपरिक राजसी आभूषणों की पहचान को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर पेश किया गया, जिससे ग्रैंड फिनाले में विरासत और नए दौर की ज्वैलरी का संगम नजर आया। राजपूती और मुगल स्थापत्य से प्रेरित सौंदर्य को परिधानों और आभूषणों के जरिए आधुनिक रूप में प्रस्तुत करना इस सीक्वेंस की खासियत रही। पूर्व विधायक मोहनलाल गुप्ता सहित फैशन, कला और संस्कृति से जुड़ी हस्तियां मौजूद रहीं।
