नमस्कार, RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने युवाओं से ‘रील’ वाला आह्वान कर दिया। जैसलमेर में पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने तनोट माता से ‘मन्नत’ मांगी है। बूंदी में BSS प्रमुख नरेश मीणा ने कहा कि ठेला नीलाम करूं तो फॉर्च्यूनर आ जाए और झालावाड़ SP ने सुनाई दर्दभरी कविता। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. हनुमान बेनीवाल का ‘रील वालों’ से आह्वान हनुमान बेनीवाल जब बोलते हैं तो किसी न किसी की शामत आती है। कोई विरोधी पार्टी का हो या फिर अपना ही सगा हो। किसी को नहीं छोड़ते। पंचायत चुनाव में पार्टी का दमखम दिखाने के लिए बेनीवाल पूरा जोर लगाए हुए हैं। किसानों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। बॉर्डर एरिया के जिलों में खूब घूम रहे हैं। बीकानेर में पंचायत चुनाव को लेकर हुई सभा में उन्होंने तंज कसते हुए कहा- जो हंस रहे थे कि हनुमान बेनीवाल की पत्नी को हरा दिया। देखो वे फंस गए। उनके भ्रष्टाचार सामने आ रहे हैं। मेरी पार्टी का गठन ही भ्रष्टाचार के खिलाफ हुआ है। जहां करप्शन देखता हूं, उसके खिलाफ बोलता हूं। किसान जवान को जरूरत होती है तो आधी रात को आ जाता हूं। एक और बयान में वे बोले- जो लोग किसी को नहीं जानते, किसी का भला नहीं करते, दो-दो बार मंत्री बन गए, जो झूठे वादे करते हैं, वो लगातार जीत जाते हैं। हमारे जैसे लोग जिनके तीन से एक विधायक, एक से जीरो पर आ गए। फिर भी लड़ रहे हैं। इसके बाद भी बेनीवाल को अपने नाम की ताकत का भरोसा है। उन्होंने युवाओं आह्वान करते हुए कहा- जो लोग मेरे साथ रील बनाते हैं, वो पंचायत का चुनाव लड़कर देख लो, मेरे नाम की ताकत का पता चल जाएगा। चुनाव को देखते हुए युवाओं ने भी भजन गाने शुरू कर दिए हैं- मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान… 2. पूर्व सीएम ने तनोट माता से की मन्नत तनोट माता की महिमा अपरम्पार है। युद्ध के दौरान पड़ोसी दुश्मन की सेना ने खूब गोले दागे। आसपास की हर चीज ध्वस्त हो गई। लेकिन माता का मंदिर ज्यों का त्यों रहा। कोई गोला माता का कुछ नहीं बिगाड़ सका। जैसलमेर की उन्हीं तनोट माता की शरण में पूर्व सीएम अशोक गहलोत पहुंचे। दर्शन किए। मन्नत का धागा बंधवाया। पूर्व सीएम पर भी कई तरह के गोले दागे जाते हैं। अब तक तो तरकीब लगाकर वे रास्ता निकाल लेते हैं। अब माता के आशीर्वाद की जरूरत महसूस हो रही है। दर्शन भी उस वक्त किए जब दूसरी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पाकिस्तान वाले बयान को लेकर खूब घिरे। कई बार पूर्व सीएम बिना बोले भी बयान दे देते हैं। उनका एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक समर्थक उन्हें बता रहा है कि उन्होंने उन पर काफी सारी रीलें बना रखी हैं। एक रील साढ़े छह हजार चली। समर्थकों को वीडियो गहलोत के फैन्स की ओर से खूब शेयर किए जाते हैं। इस तरह हवा बनी रहती है। हवा का बहुत महत्व है। कई बार ऊपर आता गोला हवा से खिसक कर दूसरे के सिर गिर जाता है। यह भी माता के आशीर्वाद से ही होता है। 3. नरेश मीणा की आक्रामकता आक्रामकता उनका गहना है। राजनीति में उनका सितारा एक थप्पड़ से चमका था। वे स्टार बन गए। इसके बाद उन्होंने आक्रामकता का आभूषण उतारा नहीं। वे उसे लिए घूमते हैं। हथियार पैने रखने के लिए अपने ही समर्थकों पर लात-घूसों की प्रैक्टिस कर लेते हैं। इससे मारक क्षमता बनी रहती है। वे अपना ही गुणगान भूरे-भूरे शब्दों में करते हैं। हाड़ौती के कोटा-बूंदी-बारां में किस्मत बुलंद करने के लिए वे सीधे बड़े नेताओं पर हमले करते हैं। भाया-बिड़ला और धारीवाल को मिलाकर उन्होंने नारा गढ़ लिया। वे खुलेआम करते हैं कि मैं पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए पैदा नहीं हुआ। जिस प्रकार का समर्थन उन्हें मिल रहा है, उससे उनका आक्रामकता आभूषण से पारस में तब्दील हो गई है। उन्हें इस बात का गुमान भी है। बूंदी की जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा- जिस ठेले में मैं बारां से जयपुर तक गया। उसकी अगर बोली लगा दूं तो वही ठेला फॉर्च्यूनर और डिफेंडर से महंगा बिक जाएगा। राजनीति में सब कुछ चलता है, अभिमान नहीं चलता। कभी-कभार यह फायदा कर देता है, लेकिन भाषण पर मजे लेकर तालियां पीटने वाली जनता वोट डालते समय गहनता से विचार करती है। यही वजह है कि पूर्व मंत्री अशोक चांदना भी इसी इलाके में प्रचार तो कर रहे हैं, लेकिन उनके भाषण का केंद्र आज भी स्मार्ट मीटर है। बोले- चाहे जेल जाना पड़े या केस खाना पड़े, स्मार्ट मीटर नहीं लगने दूंगा। 4. चलते-चलते.. खाकी का जिक्र होते हैं जेहन में कई बातें आती हैं। कभी भ्रष्टाचार दिमाग में घूमता है। कभी लापरवाही तो कभी दबंगई। लेकिन झालावाड़ के एसपी IPS अमित कुमार बुडानिया ने एक कवि सम्मेलन में खाकी का नया अवतार दिखाया। एक गूंगे पिता और अंधी मां के इकलौते 7 साल के बच्चे की डूबकर हुई मौत की घटना पर उन्होंने कविता लिखी। सम्मेलन में उसे पढ़कर सुनाया। जिस गहराई के साथ उन्होंने घटना को महसूस कर शब्दों में पिरोया उस पर हर किसी की आंखें नम हो गईं। श्रोताओं से बार-बार दाद उठीं- वाह साहब वाह। कविता का ये अंश पढ़िए- जब पैर के नीचे जमीन नहीं मिली
तो उसने किनारे तक पहुंचने की कोशिश की होगी
मां को पुकारा होगा
बाबा को आवाज दी होगी
शायद आवाज सुनकर पिता दौड़ा
लेकिन गूंगा पिता मदद के लिए किसे आवाज देता? वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
