श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में मंगलवार को विजयादशमी पर शस्त्र पूजन किया गया। शस्त्र पूजन के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति अर्पित कर शारदीय नवरात्रा महोत्सव के विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का समापन हुआ। शारदीय नवरात्रा महोत्सव में आसोज शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से दशमी तक श्री दूधेश्वर पीठाधीश्वर (गाजियाबाद) महंत नारायण गिरि महाराज और श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर, जसोल के महंत गणेशपुरी महाराज के सान्निध्य और संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में संस्थान प्रवक्ता हरिशचंद्र सिंह जसोल ने मां जसोल के सभी श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति, उनके परिवारों की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण के पवित्र संकल्प के साथ विशेष हवन-पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए गए। ये सभी धार्मिक अनुष्ठान श्री दूधेश्वर वेद विद्यापीठ, गाजियाबाद के विद्वान आचार्यों और पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार तथा शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ संपन्न हुए। रोजाना मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना कर यज्ञाग्नि में आहुतियां अर्पित की गईं। 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विशेष आराधना शारदीय नवरात्रा महोत्सव के दौरान आदिशक्ति मां दुर्गा के 9 दिव्य स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की गई। प्रतिपदा को मां शैलपुत्री, द्वितीया को मां ब्रह्मचारिणी, तृतीया को मां चंद्रघंटा, चतुर्थी को मां कूष्मांडा, पंचमी को मां स्कंदमाता, षष्ठी को मां कात्यायनी, सप्तमी को मां कालरात्रि, अष्टमी को मां महागौरी एवं नवमी को मां सिद्धिदात्री की आराधना की गई। हर दिन संबंधित देवी स्वरूप की महिमा के अनुरूप विशेष मंत्रोच्चार और हवन कर यज्ञाग्नि में आहुतियां अर्पित की गईं। इन अनुष्ठानों के माध्यम से शक्ति, साहस, ज्ञान, संयम, आरोग्यता, समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की गई। महोत्सव के दौरान कन्या पूजन, महाआरती एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी हुआ। कन्याओं को मां भगवती का साक्षात स्वरूप मानकर उनका विधिवत पूजन किया गया। फल, प्रसाद एवं दक्षिणा अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। संपूर्ण महोत्सव में मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार एवं मां भगवती के जयकारों से गुंजायमान रहा। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन और यज्ञ की पूर्णाहुति विजयादशमी पर धर्म, शक्ति, शौर्य एवं गौरवशाली क्षात्र परंपराओं के प्रतीक मंदिर परिसर स्थित सभी मंदिरों में विराजमान शस्त्रों का पूजन किया गया। शस्त्रों पर तिलक, पुष्प एवं पूजन सामग्री अर्पित कर धर्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा, न्याय एवं समाज कल्याण का संकल्प लिया गया। इसके बाद प्रतिपदा से शुरू हुए विशेष हवन-पूजन की पूर्णाहुति संपन्न हुई। विद्वान आचार्यों एवं पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञाग्नि में पूर्णाहुति अर्पित कर मां भगवती से समस्त श्रद्धालुओं, क्षेत्रवासियों एवं राष्ट्र के कल्याण की प्रार्थना की। इस दौरान शंखनाद एवं मां भगवती के जयकारों से संपूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। नवरात्रा महोत्सव में उमड़े श्रद्धालु शारदीय नवरात्रा महोत्सव के दौरान जसोल धाम में श्रद्धालुओं की अपार आस्था एवं उत्साह देखने को मिला। प्रतिपदा से दशमी तक राजस्थान सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से लाखों श्रद्धालु मां जसोल के पावन दरबार में दर्शन के लिए पहुंचे। विशेष रूप से नवरात्रा की प्रमुख तिथियों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर स्थित श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला-गौरा भैरूजी के पावन मंदिरों में दर्शन-पूजन कर अपने परिवारों के मंगलमय जीवन की कामना की। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम दर्शन के लिए संस्थान द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गईं। इनमें सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों से सतत निगरानी, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, मिस्टिंग सिस्टम, दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्हीलचेयर तथा गोल्फ कार्ट सुविधा प्रमुख रहीं। इसके अलावा छायादार टेंट, सुव्यवस्थित प्रसाद अर्पण व्यवस्था, प्रसाद टोकन प्रणाली, विश्राम एवं प्रसाद ग्रहण करने की व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा, पार्किंग, यातायात नियंत्रण तथा भोजनशाला के माध्यम से भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई। भारी श्रद्धालु आवागमन को ध्यान में रखते हुए पार्किंग स्थलों पर वाहनों के सुव्यवस्थित संचालन एवं सुरक्षित आवागमन पर विशेष ध्यान दिया गया। संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने पूरे महोत्सव में श्रद्धालुओं की सेवा एवं व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सक्रिय योगदान दिया। धर्म, मर्यादा एवं शौर्य की विजय का महापर्व विजयादशमी- किशन सिंह जसोल संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने समस्त श्रद्धालु भक्तों एवं देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विजयादशमी भारतीय सनातन संस्कृति में धर्म, सत्य, न्याय, मर्यादा एवं शौर्य की विजय का महान पर्व है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की रावण पर विजय यह संदेश देती है कि सत्य एवं धर्म की शक्ति सदैव विजयी होती है। यह महापर्व जीवन में सदाचार, कर्तव्यनिष्ठा एवं अनुशासन के साथ धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। भारतीय संस्कृति में शस्त्र पूजन की परंपरा शक्ति, साहस, आत्मरक्षा, राष्ट्ररक्षा एवं धर्मरक्षा के उच्च आदर्शों से जुड़ी हुई है। यह हमारी वीरता, स्वाभिमान एवं गौरवशाली क्षात्र परंपराओं का प्रतीक है, जो अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य का उपयोग धर्म, न्याय, निर्बलों की रक्षा, मातृभूमि की सुरक्षा एवं समाज कल्याण के लिए करने का संदेश देती है। सनातन परंपराओं में शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। मां भगवती की आराधना जीवन की चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करने, सकारात्मक विचारों को अपनाने तथा धर्म एवं मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देती है। जसोल धाम जन-जन की आस्था, श्रद्धा एवं भक्ति का पावन केंद्र है। मां जसोल की असीम कृपा से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति, आत्मिक संतोष एवं सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। नवरात्रा महोत्सव में लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति मां जसोल के प्रति जन-जन की अटूट आस्था का प्रमाण है। रावल किशन सिंह जसोल ने महोत्सव के सफल आयोजन में पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्रदान करने वाले पूज्य संतों, धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाने वाले विद्वान आचार्यों एवं पंडितों, श्रद्धालु भक्तों, सेवाभावी कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्मिकों तथा संस्थान के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पण, सहयोग एवं सेवाभाव की सराहना करते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। नवरात्रा के 9 दिन आत्मशुद्धि, शक्ति साधना के प्रतीक- हरिशचंद्र सिंह जसोल संस्थान प्रवक्ता हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि शारदीय नवरात्रा के 9 दिन मां आदिशक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक साधना एवं सकारात्मक ऊर्जा के जागरण का पावन अवसर हैं। मां दुर्गा के 9 दिव्य स्वरूप मानव जीवन में साहस, संयम, धैर्य, ज्ञान, करुणा, सेवा, शक्ति एवं सदाचार जैसे श्रेष्ठ गुणों को आत्मसात करने की प्रेरणा देते हैं। प्रतिपदा से दशमी तक आयोजित विशेष हवन-पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का मूल उद्देश्य मां जसोल के समस्त श्रद्धालु भक्तों की संपूर्ण मनोकामनाओं की पूर्ति, उनके परिवारों की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली के साथ संपूर्ण समाज, राष्ट्र एवं विश्व के कल्याण की मंगलकामना करना रहा। पूज्य संतों के पावन सान्निध्य एवं संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में संपन्न इन अनुष्ठानों के दौरान विद्वान आचार्यों ने मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों की आराधना कर यज्ञाग्नि में विशेष आहुतियां अर्पित की। जसोल धाम की पहचान मां जसोल के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं एवं सेवा के पवित्र भाव से जुड़ी हुई है। नवरात्रा महोत्सव में लाखों श्रद्धालुओं का आगमन और उनकी सेवा में संस्थान के कार्मिकों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं का समर्पण धार्मिक एवं सामाजिक एकता की भावना को सुदृढ़ करता है। श्रद्धालुओं की सेवा ही संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है। युवाओं से धर्म, संस्कृति, राष्ट्रसेवा के लिए आगे आने का आह्वान हरिशचंद्र सिंह जसोल ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी भारत की गौरवशाली सनातन संस्कृति, धर्म, इतिहास एवं महान परंपराओं की संवाहक है। युवाओं को मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मां भगवती की शक्ति एवं हमारे वीर पूर्वजों के अदम्य साहस, त्याग, बलिदान एवं शौर्य से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में अनुशासन, उत्तम चरित्र, संस्कार, साहस एवं राष्ट्रभक्ति को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए विजयादशमी का महापर्व अपने भीतर की बुराइयों, दुर्गुणों एवं नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त कर श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। युवा शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी सामर्थ्य है। युवाओं को अपनी ऊर्जा का उपयोग शिक्षा, सेवा, संस्कार, सामाजिक उत्थान एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों में करना चाहिए। युवाओं को नशामुक्त, संस्कारवान, शिक्षित, संगठित एवं आत्मनिर्भर समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। मातृशक्ति का सम्मान, सामाजिक समरसता, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, धर्म-संस्कृति का संवर्धन एवं राष्ट्रसेवा प्रत्येक युवा के जीवन का महत्वपूर्ण ध्येय होना चाहिए। सनातन संस्कृति ने सदैव मानवता, सेवा, त्याग, परोपकार, सद्भाव एवं लोककल्याण का संदेश दिया है। इन महान जीवन मूल्यों को व्यवहार में अपनाकर ही हम अपनी गौरवशाली परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा सकते हैं। हरिशचंद्र सिंह जसोल ने सभी से धर्म, सत्य, न्याय, मर्यादा एवं राष्ट्रहित के मार्ग पर चलते हुए अपनी संस्कृति, संस्कारों एवं राष्ट्र के गौरव को अक्षुण्ण बनाए रखने तथा एक सशक्त, समरस, संस्कारवान एवं समृद्ध समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लेने का आह्वान किया। शारदीय नवरात्रा महोत्सव के समापन पर माँ जसोल के श्रीचरणों में समस्त श्रद्धालु भक्तों, क्षेत्रवासियों एवं देशवासियों के मंगलमय भविष्य की प्रार्थना की गई।