सरपंच या प्रधान बनने की तैयारी कर ली है, लेकिन आपके घर में शौचालय नहीं है तो क्या आपके चुनाव लड़ने का सपना टूट सकता है। ऐसे ही कई सारे नियम हैं, जो सरपंच-पंच या पंचायत समिति/जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए जरूरी है। नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले इन नियमों को समझना और जानना बेहद जरूरी है। इसके अलावा दो से अधिक बच्चों वाले चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं? अनपढ़ या 8वीं फेल हैं तो सरपंच का चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं? पर्चा भरने के लिए कौन-कौन से दस्तावेजों की जरूरत होगी? यही सब जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल – 1 : मैं सरपंच बनना चाहता हूं। मेरे लिए योग्यता क्या है? जवाब: सरपंच बनने के लिए आपको सबसे पहले इन 4 बातों का सबसे ज्यादा ख्याल रखना है। इन 4 बिंदुओं में फिट होने की स्थिति में ही आप आवेदन के लिए अपनी तैयारी शुरू कर सकते हैं। सवाल-2 : मुझे पर्चा भरने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज-फॉर्म चाहिए होंगे? जवाब: 5 तरह के फॉर्म और घोषणा पत्र सबसे जरूरी हैं। पर्चा भरने से पहले इसकी एक चेकलिस्ट बनाकर रख लें। नामांकन फॉर्म: सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव लड़ना है तो आपको लिए नामांकन फॉर्म-4 है। जिसमें नाम, पता, मोबाइल नंबर जैसी जानकारियां भरनी होंगी। पंचायत समिति/जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए फॉर्म-4 A भरकर जमा कराना होगा। केस कितने हैं?: आवेदक को क्राइम से जुड़े केसों (मुकदमों) का ब्योरा देना होगा। इसके लिए उन्हें फॉर्म 4-घ भरना पड़ेगा। शौचालय का घोषणा पत्र: आवेदक को अपने घर में शौचालय बने होने की जानकारी देनी होगी। इसके लिए फॉर्म 6 C भरकर देना होगा। प्रॉपर्टी कितनी है?: कितना पैसा कैश है, कितने गहने, कितनी जमीन है, इन सबकी जानकारी देनी होगी। पंच-सरपंच के लिए फॉर्म I-B के तहत 50 रुपए के स्टांप पेपर पर प्रिंट कराना होगा। यह नियम वार्ड पंचों के लिए लागू नहीं है। जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के लिए फॉर्म I-A के तहत 50 रुपए के स्टांप पेपर पर प्रिंट कराना होगा। निजी जानकारियों वाला फॉर्म: नाम-पता, मोबाइल नंबर जैसी तमाम जानकारियां सांख्यिकी सूचना फॉर्म में भरकर देनी होंगी। इसमें उम्मीदवार का पासपोर्ट साइज फोटो भी लगेगा। फॉर्म 6 E भरकर जमा कराना पड़ेगा। जाति प्रमाण पत्र-: एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए रिजर्व सीट की स्थिति में आवेदक को जाति प्रमाण पत्र भी जमा कराना होगा। सवाल-3 : घर में शौचालय वाले नियम का सच क्या है? जवाब: इस नियम की अनदेखी भारी पड़ सकती है, क्योंकि उम्मीदवार के घर में शौचालय होना बेहद जरूरी है। इससे भी जरूरी शर्त ये है कि परिवार का प्रत्येक सदस्य उस शौचालय का इस्तेमाल करता हो। कोई भी सदस्य खुले में शौच नहीं जाता हो। इसके लिए बाकायदा घोषणा पत्र भी फॉर्म 6-C के साथ जमा कराना होगा। मान लीजिए आपने घोषणा पत्र में भर दिया हां, घर में शौचालय है और सभी सदस्य इसका इस्तेमाल करते हैं। बाद में शिकायत हुई और जांच के दौरान घर पर शौचालय नहीं मिला तो आपका नामांकन रद्द भी हो सकता है। सवाल-4: फॉर्म भरने की फीस कितनी है? जवाब: चुनाव आयोग के अनुसार फॉर्म भरने की कोई फीस नहीं होती, लेकिन जमानत राशि भरनी पड़ती है। सरपंच पद के लिए सामान्य श्रेणी के आवेदकों को 500 रुपए की जमानत राशि (प्रतिभूति राशि) फॉर्म के साथ जमा करानी होगी। महिलाओं, एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए जमानत राशि 250 रुपए है। सवाल-5: क्या 8वीं फेल भी सरपंच-प्रधान का चुनाव लड़ सकता है? जवाब: हां, बिल्कुल लड़ सकता है…पहले ये नियम था कि सरपंच के लिए 8वीं पास और पंचायत समिति सदस्य के लिए 10वीं पास होना जरूरी है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। वर्तमान नियमों के अनुसार, अनपढ़ या निरक्षर व्यक्ति भी सरपंच, वार्ड पंच या सदस्य पद का चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह योग्य हैं और कानूनी रूप से अपना नामांकन पर्चा दाखिल कर सकते हैं। दरअसल, इस शर्त को लेकर गफलत इसलिए होती है क्योंकि- तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार में ‘राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2015’ के तहत सामान्य और गैर-अनुसूचित क्षेत्र में सरपंच पद के लिए उम्मीदवार का कम से कम 8वीं पास होना अनिवार्य किया था। वहीं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ट्राइबल क्षेत्र (TSP एरिया) में सरपंच पद के लिए न्यूनतम योग्यता 5वीं पास रखी गई थी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के लिए कम से कम 10वीं पास होना जरूरी था, लेकिन 2019 में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने इस शर्त को हटा दिया। सरकार ने तर्क दिया कि गांव के अनुभवी, लोकप्रिय और समाजसेवी लोग सिर्फ डिग्री नहीं होने की वजह से बाहर हो जाते हैं। सवाल-6: अगर 2 से ज्यादा बच्चे हैं तो क्या चुनाव नहीं लड़ पाएंगे? जवाब: ऐसा नियम अब नहीं है। कितने भी बच्चे हों, आप चुनाव लड़ सकते हैं। राजस्थान सरकार ने करीब 30 साल से चले आ रहे दो से अधिक संतान वाले नियम को अब खत्म कर दिया है। दरअसल, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19 के तहत 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरी संतान होने पर चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया जाता था। लेकिन मौजूदा सरकार ने 10 मार्च 2026 को राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा में पारित कर दिया। 25 मार्च 2026 को राजपत्र में इसकी अधिसूचना जारी हुई और राज्य निर्वाचन आयोग ने 13 जुलाई 2026 को सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अब दो-संतान की शर्त लागू नहीं होगी। सवाल-7 : सरपंच चुनाव में कितना पैसा खर्च कर सकते हैं? जवाब: RAS अधिकारी रजत कुमार चौधरी के अनुसार पंचायत राज चुनावों के दौरान सरपंच 1 लाख रुपए तक खर्च कर सकता है। जबकि पंचायत समिति सदस्य के लिए यही सीमा डेढ़ लाख रुपए है। जिला परिषद सदस्य इन चुनावों के दौरान अधिकतम 3 लाख रुपए तक की राशि खर्च कर सकते हैं। सवाल-8 : अगर कोई प्रधान और जिला प्रमुख का चुनाव लड़ना चाहेगा तो? जवाब : इसके लिए दिग्गज नेताओं को पहले खुद जिला परिषद या पंचायत समिति सदस्य का चुनाव जीतना होगा। वार्ड पंच-सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य चुनाव के लिए चार चरणों में वोटिंग होगी। पहला चरण 23 अक्टूबर से शुरू होकर 16 नवंबर तक चलेगा। इसके बाद 25 नवंबर को जिला परिषद के नव निर्वाचित सदस्य अपने-अपने जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे। जबकि 27 नवंबर को पंचायत समिति के नए चुने गए सदस्य अपने-अपने प्रधान को चुनेंगे। पंचायत चुनाव का पूरा शेड्यूल जानने के लिए इन ग्राफिक्स से गुजर जाइए
